गुप्त नवरात्रि 2026: पूजा विधि और शुभ मुहूर्त
गुप्त नवरात्रि का महत्व
हिंदू धर्म में नवरात्रि का पर्व अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दौरान भक्तजन मां दुर्गा की कृपा प्राप्त करने के लिए व्रत और पूजा करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, साल में चार बार नवरात्रि आती हैं, जिनमें से दो गुप्त नवरात्रि और दो चैत्र व शारदीय नवरात्रि होती हैं। गुप्त नवरात्रि विशेष रूप से साधना, मंत्र जाप और दस महाविद्याओं की पूजा के लिए जानी जाती है, जबकि सामान्य नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है।
गुप्त नवरात्रि की तिथियाँ
वैदिक पंचांग के अनुसार, गुप्त नवरात्रि का पर्व माघ और आषाढ़ माह में आता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस व्रत और पूजा से साधक को सभी प्रकार के भय से मुक्ति मिलती है और शुभ फल की प्राप्ति होती है। आइए जानते हैं कि गुप्त नवरात्रि कब से शुरू हो रही है और घटस्थापना का शुभ मुहूर्त क्या है।
आषाढ़ गुप्त नवरात्र 2026 की तिथियाँ
प्रतिपदा तिथि की शुरुआत: 14 जुलाई को दोपहर 03:12 बजे।
प्रतिपदा तिथि का समापन: 15 जुलाई को सुबह 11:50 बजे।
इस बार आषाढ़ गुप्त नवरात्र की शुरुआत 15 जुलाई से होगी और इसका समापन 23 जुलाई को होगा।
घटस्थापना का शुभ मुहूर्त
आषाढ़ गुप्त नवरात्र की घटस्थापना शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि पर की जाती है, जो इस बार 15 जुलाई को है। घटस्थापना का शुभ मुहूर्त 15 जुलाई को सुबह 06:01 बजे से 10:17 बजे तक रहेगा।
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:11 बजे से 04:52 बजे तक।
- विजय मुहूर्त: दोपहर 02:45 बजे से 03:40 बजे तक।
- गोधूलि मुहूर्त: शाम 07:20 बजे से 07:40 बजे तक।
- अमृत काल: दोपहर 04:05 बजे से 05:27 बजे तक।
गुप्त नवरात्रि की पूजा सामग्री
- लाल कपड़ा
- कपूर
- अक्षत
- हल्दी
- सुपारी
- मौली
- फूल
- लौंग
- रोली
- फूल माला
- इलायची
- कलश
- गंगाजल के साथ नारियल
- आम या अशोक के पत्ते
- अनाज, साफ जवा
- मिट्टी का बर्तन
- किसी पवित्र स्थान की मिट्टी (जैसे मंदिर)
- अखंड ज्योति के लिए बड़ा दीया और रुई की बाती।
गुप्त नवरात्रि में ध्यान रखने योग्य बातें
- गुप्त नवरात्रि में लहसुन, प्याज, मांस और मदिरा का सेवन नहीं करना चाहिए।
- व्रत के दौरान कुट्टू, सिंघाड़े का आटा और साबूदाना का सेवन किया जा सकता है।
- इस दौरान बाल, दाढ़ी-मूंछ और नाखून नहीं काटने चाहिए।
- ब्रह्मचार्य का पालन करना आवश्यक है।
- यदि आप अखंड ज्योति जलाते हैं, तो उसे अकेला न छोड़ें।
- रोजाना पूजा के समय दुर्गा चालीसा या दुर्गा सप्तशती का पाठ करें।
- गुप्त नवरात्रि में काले रंग के कपड़े पहनने से बचें।