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गुप्त नवरात्रि: रहस्यमय साधना और दस महाविद्याओं की पूजा

गुप्त नवरात्रि हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण पर्व है, जो शक्ति साधना का रहस्यमय रूप है। यह पर्व माघ और आषाढ़ में आता है और इसमें दस महाविद्याओं की पूजा की जाती है। जानें कब शुरू होती है गुप्त नवरात्रि, किस प्रकार की साधना की जाती है, और क्या हैं इसके दौरान की विशेष सावधानियाँ। इस लेख में गुप्त नवरात्रि की पूजा विधि और इसके महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई है।
 

गुप्त नवरात्रि का महत्व

हिंदू धर्म में चैत्र और शारदीय नवरात्रि के अतिरिक्त, दो विशेष 'गुप्त नवरात्रि' भी मनाई जाती हैं। ये नवरात्रि शक्ति साधना का एक गूढ़ और प्रभावशाली पर्व मानी जाती हैं। माघ और आषाढ़ के महीनों में आने वाली इन नवरात्रियों को तांत्रिक और अघोरी साधकों के लिए विशेष महत्व दिया जाता है। इस दौरान, अघोरी और तांत्रिक अपनी साधना को सिद्ध करने के लिए 'दस महाविद्याओं' की पूजा करते हैं। गुप्त नवरात्रि में की जाने वाली साधना को अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रभावशाली माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इन नवरात्रियों में दस महाविद्याओं या विशेष देवियों की आराधना करने से भक्त को इच्छित फल प्राप्त होता है।


गुप्त नवरात्रि की तिथियाँ

गुप्त नवरात्रि हर साल आषाढ़ माह की प्रतिपदा तिथि से आरंभ होती है। इस वर्ष, यह 15 जुलाई 2026 से शुरू होकर 23 जुलाई 2026 को समाप्त होगी।


दस महाविद्याओं की पूजा

गुप्त नवरात्रि के दौरान, 9 दुर्गाओं के स्थान पर 10 देवियों की विशेष पूजा की जाती है।


मां काली


मां तारा


मां त्रिपुर सुंदरी


मां भुवनेश्वरी


मां छिन्नमस्ता


मां त्रिपुर भैरवी


मां धूमावती


मां बगलामुखी


मां मातंगी


मां कमला


गुप्त नवरात्रि पूजा विधि और सावधानियाँ

गुप्त नवरात्रि की पूजा को 'गुप्त' रखा जाता है। जितना अधिक इसे गुप्त रखा जाएगा, उतना ही अधिक फल प्राप्त होगा।


इस साधना को मध्यरात्रि, निशिथ काल में करना शुभ माना जाता है।


यदि संभव हो, तो 9 दिनों तक अखंड ज्योति जलाना चाहिए।


मनोकामना के अनुसार संबंधित देवी के मंत्रों का जाप करना चाहिए।


गुप्त नवरात्रि के 9 दिनों तक सात्विक आहार लेना और ब्रह्मचर्य का पालन करना आवश्यक है।