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चैती छठ महापर्व: अनुष्ठान की शुरुआत और महत्व

चैती छठ महापर्व का चार दिवसीय अनुष्ठान 22 मार्च से शुरू होगा। इस पर्व की शुरुआत नहाय-खाय से होती है, जिसमें व्रति स्नान कर पूजन करती हैं। खरना पूजा के बाद 36 घंटे का निर्जला उपवास शुरू होता है। जानें इस महापर्व की विशेषताएँ और व्रत की प्रक्रिया के बारे में।
 

चैती छठ का चार दिवसीय अनुष्ठान


नई दिल्ली। चैती छठ का चार दिवसीय अनुष्ठान चैत्र शुक्ल चतुर्थी तिथि से शुरू होगा, जो रविवार को नहाय-खाय के साथ आरंभ होगा। इस दिन व्रति स्नान करके घर में गंगाजल लाकर पूजन करेंगी और अरवा चावल, सेंधा नमक, चने की दाल, लौकी की सब्जी, आंवला की चटनी आदि का सेवन कर चार दिवसीय अनुष्ठान का संकल्प लेंगी। सोमवार को व्रति निराहार रहकर शाम को खरना पूजा करेंगी, जिसमें गुड़ से बनी खीर का प्रसाद ग्रहण किया जाएगा। इसके साथ ही 36 घंटे का निर्जला उपवास शुरू होगा।


24 मार्च मंगलवार को व्रति डूबते सूर्य को अर्घ्य देंगी और 25 मार्च बुधवार को उगते सूर्य को अर्घ्य देकर इस महापर्व का समापन करेंगी। मान्यता है कि खरना का प्रसाद ग्रहण करने से स्वास्थ्य में सुधार होता है और बौद्धिक क्षमता में वृद्धि होती है। इस वर्ष चैती छठ पूजा 22 मार्च रविवार से नहाय-खाय के साथ शुरू होगी। इस दिन महिलाएं नदी में स्नान करके सात्विक भोजन ग्रहण करती हैं, जिससे उन्हें आने वाले व्रत के लिए मानसिक और शारीरिक ताकत मिलती है। अगले दिन 23 मार्च को खरना मनाया जाएगा। 24 मार्च को व्रति महिलाएं घाट पर जाकर डूबते सूर्य को अर्घ्य अर्पित करेंगी और छठ मईया की पूजा करेंगी। 25 मार्च को सूर्योदय के समय उगते सूर्य को अर्घ्य देकर परिवार की सुख-समृद्धि और संतान की लंबी आयु की कामना की जाएगी। इसी दिन 36 घंटे का कठिन व्रत समाप्त होगा।