×

चैत्र नवरात्रि 2024: देवी दुर्गा का आगमन और उसके संकेत

चैत्र नवरात्रि 2024 का आरंभ 9 अप्रैल से होगा, जिसमें देवी दुर्गा पालकी में सवार होकर आएंगी। ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास के अनुसार, इस बार का आगमन कई संकेत लेकर आएगा, जिसमें महामारी और सामाजिक-राजनीतिक उथल-पुथल की आशंका है। जानें इस पर्व का महत्व, घट स्थापना का मुहूर्त और देवी के वाहन का प्रभाव।
 

चैत्र नवरात्रि का महत्व

चैत्र नवरात्रि का आरंभ चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से होता है। इस वर्ष, यह पर्व 9 अप्रैल 2024 से शुरू होगा और 17 अप्रैल को समाप्त होगा। पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान, जयपुर जोधपुर के निदेशक ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास के अनुसार, चैत्र नवरात्रि के साथ नया हिंदू वर्ष भी प्रारंभ होता है। इस बार नौ दिनों की नवरात्रि मनाई जाएगी। हिंदू पंचांग के अनुसार, चैत्र मास की शुक्ल पक्ष प्रतिपदा तिथि 19 मार्च को सुबह 6:52 बजे से शुरू होगी और इसका समापन 20 मार्च को सुबह 4:52 बजे होगा। इसलिए, इस वर्ष चैत्र नवरात्रि की शुरुआत 19 मार्च को घटस्थापना के साथ होगी। उदया तिथि के अनुसार, चैत्र नवरात्रि 19 मार्च से शुरू होकर 27 मार्च तक चलेगी। इस बार माता रानी पालकी में सवार होकर आ रही हैं, जो संकेत करता है कि इस बार उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। इसके प्रभाव संपूर्ण विश्व पर पड़ने की संभावना है। मान्यता के अनुसार, माता रानी का पालकी पर आना यह दर्शाता है कि देश और दुनिया महामारी और बीमारियों की चपेट में आ सकती है। इसके अलावा, इसे व्यापार, अर्थव्यवस्था और राजनीति के लिए भी शुभ नहीं माना गया है।


देवी दुर्गा के वाहन का प्रभाव

ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास ने बताया कि हर नवरात्रि में देवी अलग-अलग वाहनों पर आती हैं, और इस आधार पर अगले छह महीनों की स्थिति का अनुमान लगाया जाता है। इस बार मां दुर्गा पालकी पर सवार होकर आएंगी। देवी भागवत में पालकी में माता के आगमन का फल "ढोलायां मरणं धुवम्" बताया गया है, जो जन हानि और रक्तपात का संकेत देता है। इसका मतलब है कि पालकी पर माता का आगमन शुभता का संकेत नहीं है। माता का डोली पर आगमन सामाजिक-राजनीतिक उथल-पुथल और महामारी का परिचायक माना गया है। पूरे साल चार नवरात्रि आती हैं, जिनमें आश्विन और चैत्र मास की नवरात्रि सबसे अधिक प्रचलित हैं। कहा जाता है कि सतयुग में चैत्र नवरात्रि सबसे प्रसिद्ध थी, और इसी दिन से युग का आरंभ भी माना जाता है। इसलिए, संवत का आरंभ चैत्र नवरात्रि से होता है।


तिथि और शुभ योग

भविष्यवक्ता एवं कुंडली विश्लेषक डॉ. अनीष व्यास ने बताया कि हिंदू पंचांग के अनुसार, चैत्र मास की शुक्ल पक्ष प्रतिपदा तिथि 19 मार्च को सुबह 6:52 बजे से शुरू होगी और इसका समापन 20 मार्च को सुबह 4:52 बजे होगा। इस वर्ष चैत्र नवरात्रि की शुरुआत 19 मार्च को घटस्थापना के साथ होगी। उदया तिथि के अनुसार, चैत्र नवरात्रि 19 मार्च से शुरू होकर 27 मार्च तक चलेगी। चैत्र नवरात्रि प्रतिपदा तिथि से नया हिंदू वर्ष प्रारंभ होता है।


घट स्थापना का मुहूर्त

द्विस्वभाव मीनलग्न प्रातः 06:54 से प्रातः 07:50 तक
मिथुनलग्न प्रातः 11:24 से दोपहर 01:38 तक
शुभ चौघड़िया प्रातः 06:54 से प्रातः 08:05,
चर-लाभ-अमृत का चौघड़िया प्रातः वकः 84 से दोपहर 03:32 तक
अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:11 से 12:59 तक रहेगा।