चैत्र नवरात्रि: माता ब्रह्मचारिणी की पूजा विधि और महत्व
चैत्र नवरात्रि का महत्व
चैत्र नवरात्रि और माता ब्रह्मचारिणी: इस वर्ष चैत्र नवरात्रि का पर्व 19 मार्च से आरंभ हुआ और यह 27 मार्च, शुक्रवार को समाप्त होगा। आज, 20 मार्च, शुक्रवार को नवरात्रि का दूसरा दिन है। इस दिन पूजी जाने वाली देवी ब्रह्मचारिणी तप, त्याग और संयम का प्रतीक मानी जाती हैं। पूर्व जन्म में हिमालय में पुत्री के रूप में जन्मी माता ने नारद जी के उपदेश पर भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए कठोर तप किया, जिसके कारण उनका नाम तपश्चारिणी या ब्रह्मचारिणी पड़ा। उन्होंने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठिन तपस्या की थी। देवी के दाहिने हाथ में जपमाला और बाएं हाथ में कमंडल है, जो ज्ञान और तप का प्रतीक है। उनकी उपासना से धैर्य और सफलता प्राप्त होती है। मान्यता है कि माता ब्रह्मचारिणी की सच्चे मन से पूजा करने से मनचाहा वरदान मिलता है।
माता ब्रह्मचारिणी का स्वरूप
स्वरूप: देवी ने सफेद वस्त्र धारण किए हैं और उनकी मुद्रा शांत और सौम्य है। 'ब्रह्म' का अर्थ तपस्या और 'चारिणी' का अर्थ आचरण करने वाली है। अर्थात, तप का आचरण करने वाली माँ।
पूजा विधि
दूसरे दिन की पूजा विधि में सुबह उठकर पूजा स्थान की सफाई करें। माता को सफेद वस्त्र, फूल, और सफेद चीजें (विशेषकर चीनी या मिश्री) का भोग लगाएं। पूजा के दौरान मां को सफेद वस्त्र अर्पित करें, क्योंकि यह रंग उन्हें प्रिय है। भोग में मेवे, पान, सुपारी, लौंग और इलायची चढ़ाना शुभ माना जाता है।
मंत्र और प्रार्थना
बीज मंत्र: ह्रीं श्री अम्बिकायै नम:
प्रार्थना: दधाना कर पद्माभ्यामक्षमाला कमण्डलू। देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥