चैत्र नवरात्रि: शिव और शक्ति का अद्भुत संयोग
चैत्र नवरात्रि का पर्व इस बार विशेष संयोग के साथ मनाया जा रहा है। 23 मार्च को नवरात्र के पांचवे दिन और सोमवार का अद्भुत संयोग है, जो शिव और शक्ति के मिलन का प्रतीक है। जानें इस दिन की पूजा विधि, विशेष सामग्री और मंत्र, जो आपके जीवन में सकारात्मकता और समृद्धि लाने में मदद कर सकते हैं।
Mar 22, 2026, 16:57 IST
नवरात्रि का पर्व और शुभ संयोग
चैत्र नवरात्रि का उत्सव पूरे देश में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जा रहा है। 23 मार्च को नवरात्र के पांचवे दिन और सोमवार का संयोग विशेष रूप से शुभ माना जा रहा है। इस दिन को स्कंदमाता को समर्पित किया गया है। इस बार यह दिन सामान्य नहीं है, क्योंकि सोमवार का अद्भुत संयोग बन रहा है, जो महादेव और शक्ति के मिलन का प्रतीक है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, नवरात्र के दौरान पड़ने वाला सोमवार अत्यंत कल्याणकारी होता है। यदि आप किसी समस्या से लंबे समय से जूझ रहे हैं, तो इस विशेष अवसर पर शिवलिंग पर विशेष सामग्री अर्पित करें।
शक्ति और शिव का मिलन
नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है, जो शक्ति का प्रतीक हैं। वहीं, सोमवार का दिन भगवान शिव को बहुत प्रिय है। इस दिन शिव-शक्ति की विधिवत पूजा करने से अखंड सौभाग्य और स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है। कहा जाता है कि इस दिन किए गए छोटे से उपाय से भी दोगुना फल मिलता है, क्योंकि शिव के बिना शक्ति अधूरी मानी जाती है।
शिवलिंग पर चढ़ाने योग्य सामग्री
कच्चा दूध और काले तिल
यदि आपका चंद्रमा कमजोर है या मन अशांत रहता है, तो चांदी के लोटे में कच्चा दूध और थोड़े काले तिल मिलाकर शिवलिंग पर चढ़ाएं। इससे मानसिक तनाव कम होता है और चंद्र दोष से राहत मिलती है।
शहद और गंगाजल
जो लोग आर्थिक तंगी से परेशान हैं, उन्हें इस सोमवार को शिवलिंग पर शहद चढ़ाना चाहिए और फिर गंगाजल से अभिषेक करना चाहिए। इससे धन के नए रास्ते खुलते हैं और घर में स्थायी लक्ष्मी का वास होता है।
बिल्व पत्र और अक्षत
आपको 5 या 11 अखंडित बिल्व पत्र पर चंदन से 'राम' लिखकर शिवलिंग पर चढ़ाना चाहिए और साथ में बिना टूटे हुए चावल अर्पित करना चाहिए। ऐसा करने से महादेव आपकी हर इच्छा को पूरा करेंगे और आपको शिव-पार्वती की कृपा प्राप्त होगी।
पूजा मंत्र
पूजा मंत्र (Puja Mantra)
- ॐ मृत्युंजयमहादेवं त्राहि मां शरणागतम्। जन्ममृत्युजराव्याधिपीडितं कर्मबन्धनै:॥
- ॐ नमः शिवाय शान्ताय तेजसे सर्वाधिष्टानाय सर्वसमर्थाय सर्वविलाय महेश्वराये नमः शिवाय ॐ॥
वंदे सूर्य शशांक वह्नि नयनं वंदे मुकुंद प्रियं, वंदे भक्त जनाश्रयं च वरदं वंदे शिवं शंकरम्॥