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जगन्नाथ रथ यात्रा: ओडिशा के भव्य रथों की अनोखी संरचना

जगन्नाथ रथ यात्रा, जो हर साल ओडिशा के पुरी में आयोजित होती है, एक अद्वितीय धार्मिक उत्सव है। इस यात्रा में भगवान जगन्नाथ और उनके भाई-बहन भव्य रथों पर सवार होकर गुंडिचा मंदिर की ओर बढ़ते हैं। रथों का निर्माण अक्षय तृतीया से शुरू होता है और इनकी सजावट ओडिशा की पारंपरिक वास्तुकला से प्रेरित होती है। जानें इन रथों की विशेषताएँ और निर्माण प्रक्रिया के बारे में।
 

जगन्नाथ रथ यात्रा का महत्व

भारत में व्रत, त्योहारों और सांस्कृतिक विविधताओं का एक अद्भुत संगम है। हर त्योहार की अपनी विशेषता होती है, और ओडिशा के पुरी में आयोजित होने वाली जगन्नाथ रथ यात्रा को दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक उत्सवों में से एक माना जाता है।


रथ यात्रा का आकर्षण

इस यात्रा में भगवान जगन्नाथ, उनके भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा भव्य रथों पर सवार होकर गुंडिचा मंदिर की ओर बढ़ते हैं। रथ यात्रा का मुख्य आकर्षण केवल भगवानों के दर्शन नहीं है, बल्कि इन विशाल रथों का निर्माण और उनकी अनोखी बनावट भी लोगों को आकर्षित करती है।


रथ निर्माण की प्रक्रिया

भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा के लिए रथों का निर्माण कार्य अक्षय तृतीया से शुरू होता है, जो एक शुभ दिन माना जाता है। इस दिन रथ निर्माण की शुरुआत वैदिक मंत्रोच्चार और पूजा के साथ होती है।


रथों की सजावट

रथों की सजावट में ओडिशा की पारंपरिक वास्तुकला का प्रभाव देखने को मिलता है। रथों पर उकेरे गए डिज़ाइन और रंग-बिरंगी पेंटिंग इनकी भव्यता को बढ़ाती हैं।


भगवान जगन्नाथ का रथ: नंदीघोष

भगवान जगन्नाथ का रथ नंदीघोष के नाम से जाना जाता है। यह रथ 45 फीट ऊँचा है और इसे 16 बड़े पहियों से सजाया जाता है।


भगवान बलभद्र का रथ: लालध्वज

भगवान बलभद्र का रथ लालध्वज कहलाता है, जिसकी ऊँचाई भी 45 फीट है और इसमें 14 पहिए होते हैं।


देवी सुभद्रा का रथ: दर्पदलन

देवी सुभद्रा का रथ दर्पदलन या देबदलन कहलाता है, जिसकी ऊँचाई 44 फीट 6 इंच है और इसमें 12 पहिए होते हैं।


रथ निर्माण की विशेषता

इन रथों की एक खास बात यह है कि इन्हें बिना किसी धातु के बनाया जाता है। लकड़ी के हिस्सों को जोड़ने के लिए खांचे और लकड़ी की खूंटियों का उपयोग किया जाता है।