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जमाई षष्ठी 2026: सास और दामाद के रिश्ते का प्रतीक त्योहार

जमाई षष्ठी, जो सास और दामाद के रिश्ते का प्रतीक है, 2026 में 20 जून को मनाया जाएगा। यह पर्व विशेष रूप से पश्चिम बंगाल में धूमधाम से मनाया जाता है। माताएं इस दिन देवी षष्ठी की पूजा करती हैं, ताकि उनके दामाद का जीवन सुखमय और समृद्ध हो। जानें इस त्योहार की तिथि, पूजा विधि और दामाद के स्वागत की खासियत। यह उत्सव न केवल धार्मिक है, बल्कि परिवारों के बीच संबंधों को भी मजबूत बनाता है।
 

जमाई षष्ठी का महत्व

भारतीय संस्कृति में रिश्तों की गहराई को दर्शाने वाला पारंपरिक त्योहार जमाई षष्ठी 2026 में 20 जून, शनिवार को मनाया जाएगा। यह पर्व विशेष रूप से पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत में धूमधाम से मनाया जाता है और यह सास और दामाद के बीच प्रेम, सम्मान और पारिवारिक बंधन का प्रतीक है। इस दिन माताएं देवी षष्ठी की पूजा करती हैं, ताकि उनके दामाद और संतान का जीवन सुखमय, दीर्घकालिक और समृद्ध हो।


जमाई षष्ठी 2026 की तिथि और शुभ मुहूर्त

वैदिक पंचांग के अनुसार, इस वर्ष ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि 19 जून 2026, शुक्रवार को शाम 4:59 बजे से शुरू होगी और 20 जून 2026, शनिवार को दोपहर 3:46 बजे समाप्त होगी। हिंदू धर्म में उदया तिथि के अनुसार, जमाई षष्ठी का मुख्य उत्सव 20 जून को मनाया जाएगा। इस दिन घरों में उत्सव का माहौल रहेगा और सास अपने दामाद का स्वागत करेंगी।


जमाई षष्ठी का त्योहार क्यों मनाया जाता है?

शब्द 'जमाई' का अर्थ दामाद और 'षष्ठी' का अर्थ हिंदू कैलेंडर की छठी तिथि है। मां षष्ठी को बच्चों की रक्षा करने वाली देवी माना जाता है। इस दिन महिलाएं व्रत रखकर मां षष्ठी से अपने दामाद की लंबी उम्र और समृद्धि की प्रार्थना करती हैं। यह पर्व केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह दो परिवारों के बीच स्नेह और संबंधों को मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है।


जमाई षष्ठी की पूजा विधि और स्वागत रस्म

इस खास दिन पर सास अपनी बेटी और दामाद को अपने मायके आमंत्रित करती हैं। सुबह स्नान के बाद, घर के मंदिर में मां षष्ठी की प्रतिमा स्थापित की जाती है और उन्हें दूर्वा, अक्षत, नए वस्त्र और मौसमी फल अर्पित किए जाते हैं। मुख्य रस्म में, सास दामाद के माथे पर दही का तिलक करती हैं और कलाई पर हल्दी से रंगा पवित्र धागा बांधती हैं, जिसे 'षष्ठी सूत्र' कहा जाता है। अंत में, दामाद का पैर छूकर आशीर्वाद लेने के बाद उन्हें उपहार दिए जाते हैं।


बंगाली संस्कृति में दामाद का विशेष भोजन

जमाई षष्ठी के दिन दामाद के स्वागत में भोजन का विशेष महत्व होता है। बंगाली परंपरा के अनुसार, इस दिन कई प्रकार के पारंपरिक व्यंजन तैयार किए जाते हैं, जिसमें विभिन्न मछलियां, संदेश, रसगुल्ला और मौसमी फल जैसे आम और लीची शामिल होते हैं। यह भोजन दामाद के प्रति ससुराल के सम्मान और सत्कार को दर्शाता है।


भारतीय समाज में जमाई षष्ठी का महत्व

शादी के बाद बेटी के नए परिवार के साथ मजबूत संबंध बनाए रखना भारतीय समाज की आत्मा है। जमाई षष्ठी का यह उत्सव दामाद को यह अहसास कराता है कि वह अपने ससुराल का एक महत्वपूर्ण सदस्य हैं। जब दामाद इस प्रेम और सत्कार को स्वीकार करता है, तो दोनों परिवारों के बीच संबंध मजबूत होते हैं और कड़वाहट की कोई गुंजाइश नहीं रहती।