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जितिया व्रत: महत्व, पारण विधि और शुभ मुहूर्त

जितिया व्रत हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण उपवास है, जो आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। महिलाएं इस दिन अपने बच्चों की लंबी उम्र और स्वास्थ्य के लिए निर्जला उपवास करती हैं। इस लेख में जानें जितिया व्रत का पारण कब और कैसे करना है, साथ ही इसके लिए शुभ मुहूर्त और विधि के बारे में जानकारी प्राप्त करें।
 

जितिया व्रत का महत्व

हिंदू धर्म में जितिया व्रत का एक विशेष स्थान है। यह व्रत आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन महिलाएं अपने बच्चों की प्रगति, दीर्घायु और स्वास्थ्य के लिए निर्जला उपवास करती हैं।


जितिया व्रत का पारण

इस व्रत को 36 घंटे तक रखा जाता है। वैदिक पंचांग के अनुसार, आज 4 अक्तूबर को जितिया व्रत का पारण किया जा रहा है। आइए जानते हैं कब और कैसे इस व्रत का पारण करना है।


जितिया व्रत 2026 पारण का शुभ मुहूर्त

जितिया व्रत का पारण नवमी तिथि को किया जाता है। 4 अक्तूबर को व्रत का पारण सुबह 7:28 बजे के बाद किया जा सकता है।


जितिया व्रत की पारण विधि

- सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें।


- फिर घर के मंदिर की सफाई करें और गंगाजल का छिड़काव करें।


- अब सूर्य देव को अर्घ्य दें और उनका आशीर्वाद प्राप्त करें।


- इसके बाद दीपक जलाकर भगवान जीमूतवाहन की विधिवत पूजा करें।


- भगवान जीमूतवाहन से संतान की लंबी आयु, सुखी जीवन और अच्छे स्वास्थ्य की प्रार्थना करें।


- पारण से पहले ब्राह्मण या जरूरतमंदों को अन्न-धन का दान करें।


- फिर नोनी के साग और रागी की रोटी का भोग लगाएं। इसके बाद सात्विक भोजन ग्रहण करें और व्रत का पारण करें।