जुलाई 2026 में धार्मिक उत्सवों की भरमार: जानें महत्वपूर्ण व्रत और त्योहार
धार्मिक उत्सवों का विशेष महीना
नई दिल्ली: जुलाई 2026 का महीना सनातन धर्म के अनुयायियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण रहेगा। इस दौरान कई प्रमुख व्रत और त्योहार एक साथ मनाए जाएंगे, जिससे पूरे महीने उत्सव का माहौल बना रहेगा। महीने की शुरुआत में गुप्त नवरात्रि और भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा का आयोजन होगा, जबकि अंत में देवशयनी एकादशी और चातुर्मास की शुरुआत होगी। चातुर्मास के दौरान सभी मांगलिक कार्यों पर रोक लग जाएगी, और लोग पूजा-पाठ, जप-तप, और ध्यान में लीन रहेंगे।
संकष्टी चतुर्थी और योगिनी एकादशी का महत्व
जुलाई की शुरुआत 3 तारीख को कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी से होगी, जिसमें भगवान गणेश की पूजा की जाएगी। इसके बाद 6 जुलाई को कालाष्टमी का व्रत रखा जाएगा, और 10 जुलाई को योगिनी एकादशी का महापुण्य मनाया जाएगा। इस दिन व्रत रखने से व्यक्ति के जीवन के बड़े से बड़े पाप और नकारात्मक कर्मों का प्रभाव समाप्त हो जाता है।
शिव पूजा का विशेष अवसर
यह महीना शिव पूजा के लिए भी खास है। 12 जुलाई को रवि प्रदोष व्रत और मासिक शिवरात्रि का संयोग बनेगा, जो महादेव को प्रिय है। इसके बाद 14 जुलाई को आषाढ़ अमावस्या मनाई जाएगी, जो पितरों के तर्पण और मन की शांति के लिए सर्वोत्तम मानी जाती है। 15 जुलाई से आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि का प्रारंभ होगा, जिसमें मां दुर्गा की गुप्त आराधना की जाएगी।
भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा
जुलाई का सबसे भव्य उत्सव 16 जुलाई को जगन्नाथ रथ यात्रा के रूप में मनाया जाएगा, जो आषाढ़ शुक्ल द्वितीया और कर्क संक्रांति के पावन दिन पड़ रहा है। इसके बाद 17 जुलाई को अनिरुद्ध विनायक चतुर्थी मनाई जाएगी, और 22 जुलाई को भड़ली नवमी का दिन विवाह और अन्य मांगलिक कार्यों के लिए महत्वपूर्ण होगा।
गुरु पूर्णिमा का महापर्व
महीने के अंत में 25 जुलाई को देवशयनी एकादशी का महापर्व आएगा, जिसे चातुर्मास की शुरुआत माना जाता है। इसके बाद 26 जुलाई को रवि प्रदोष व्रत और 28 जुलाई को कोकिला व्रत रखा जाएगा। जुलाई का समापन 29 जुलाई को गुरु पूर्णिमा और आषाढ़ पूर्णिमा के पावन उत्सव के साथ होगा, जो अपने गुरुओं के प्रति सम्मान प्रकट करने का सबसे बड़ा दिन माना जाता है।