ज्येष्ठ महीने का बड़ा मंगल: तिथियां और हनुमान जी के प्रिय भोग
ज्येष्ठ महीने में आने वाले बड़े मंगल का विशेष महत्व है। इस दिन भगवान हनुमान जी की पूजा की जाती है और उनके प्रिय भोग अर्पित किए जाते हैं। 2026 में कुल 8 बड़े मंगल मनाए जाएंगे। जानें इनकी तिथियां और हनुमान जी को प्रसन्न करने के लिए कौन से भोग अर्पित करें। इस पर्व का धार्मिक महत्व और दान-पुण्य के उपाय भी जानें।
May 3, 2026, 15:40 IST
बड़ा मंगल का महत्व
ज्येष्ठ माह में आने वाले मंगलवार को 'बड़ा मंगल' या 'बुढ़वा मंगल' के नाम से जाना जाता है। यह दिन हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, इसी महीने के एक मंगलवार को भगवान राम और हनुमान जी की पहली मुलाकात हुई थी। यह पर्व न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह आपसी प्रेम और सेवा का भी प्रतीक है। इस वर्ष अधिक मास के कारण ज्येष्ठ माह में कुल 8 बड़े मंगल मनाए जाएंगे। इस अवसर पर भगवान हनुमान जी को प्रसन्न करने के लिए उनके प्रिय भोग के बारे में जानना आवश्यक है।
बड़े मंगल की तिथियां (2026)
8 बड़े मंगल की तिथियां:
- पहला बड़ा मंगल: 5 मई (मंगलवार)
- दूसरा बड़ा मंगल: 12 मई (मंगलवार)
- तीसरा बड़ा मंगल: 19 मई (मंगलवार)
- चौथा बड़ा मंगल: 26 मई (मंगलवार)
- पांचवां बड़ा मंगल: 2 जून (मंगलवार)
- छठा बड़ा मंगल: 9 जून (मंगलवार)
- सातवां बड़ा मंगल: 16 जून (मंगलवार)
- आठवां बड़ा मंगल: 23 जून (मंगलवार)
हनुमान जी के प्रिय भोग
- बूंदी के लड्डू: हनुमान जी को बूंदी का लड्डू बहुत पसंद है। इसे चढ़ाने से ग्रहों के दोष शांत होते हैं।
- बेसन के लड्डू: शुद्ध देसी घी में बने बेसन के लड्डू अर्पित करने से जातक को सुख-समृद्धि मिलती है।
- इमरती और जलेबी: भक्तजन इस दिन केसरिया इमरती का भोग लगाते हैं, जो बजरंगबली को प्रिय है।
- तुलसी दल: हनुमान जी के भोग में तुलसी दल डालना आवश्यक है, क्योंकि इसके बिना भोग स्वीकार नहीं होता।
- पान का बीड़ा: कामों में सफलता के लिए मीठा पान (गुलकंद, सौंफ वाला) अर्पित करना शुभ माना जाता है।
- रोट का भोग: गेहूं के आटे, गुड़ और घी से बना रोट भी बड़े मंगल पर अर्पित किया जा सकता है।
बड़े मंगल का धार्मिक महत्व
पौराणिक कथाओं के अनुसार, त्रेतायुग में जब हनुमान जी ने प्रभु राम से पहली बार मुलाकात की थी, तब ज्येष्ठ माह का मंगलवार था। इसी समय बजरंगबली ने महाबली भीम का अहंकार तोड़ने के लिए वृद्ध वानर का रूप धारण किया था, इसलिए इसे 'बुढ़वा मंगल' के रूप में पूजा जाता है। इस समय दान-पुण्य करने और भंडारा करने से सुख-समृद्धि प्राप्त होती है और फल दोगुना होता है।
उपाय और सेवा
बड़े मंगल के दिन केवल मंदिर जाना ही उचित नहीं है, बल्कि जरुरतमंदों को पानी पिलाना और भोजन कराना हनुमान जी की सबसे बड़ी सेवा मानी जाती है। श्रद्धा के अनुसार जितना दान-पुण्य किया जाए, उतना ही श्रेष्ठ माना जाता है।