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ढुण्ढिराज चतुर्थी: पूजा विधि और महत्व

ढुण्ढिराज चतुर्थी का पर्व भगवान गणेश की पूजा का एक महत्वपूर्ण अवसर है। इस दिन की पूजा विधि और महत्व को समझकर भक्तजन अपने जीवन में खुशहाली और सफलता की कामना करते हैं। जानें इस पर्व का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और इससे जुड़ी पौराणिक कथा।
 

ढुण्ढिराज चतुर्थी का महत्व

ढुण्ढिराज चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की पूजा करने से जीवन की सभी बाधाएं समाप्त होती हैं और अटके हुए कार्य पूर्ण होते हैं। इस दिन गणेश स्तोत्र का पाठ करने से साधक को शुभ फल की प्राप्ति होती है और जीवन में खुशियों का आगमन होता है।


ढुण्ढिराज चतुर्थी के बारे में जानें

फाल्गुन का महीना विशेष रूप से पावन माना जाता है, जिसमें महाशिवरात्रि का पर्व भी आता है। इस महीने में भगवान शिव और माता पार्वती की भक्ति भाव से पूजा की जाती है। हर महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को विनायक गणेश चतुर्थी का व्रत रखा जाता है। इस दिन भगवान गणेश की पूजा का विधान है।


ढुण्ढिराज चतुर्थी का शुभ मुहूर्त

हिंदू पंचांग के अनुसार, हर साल फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि के बाद ढुण्ढिराज चतुर्थी मनाई जाती है। इस साल यह पर्व 21 फरवरी को मनाया जाएगा। इस दिन भक्तजन भगवान गणेश की पूजा करते हैं।


ढुण्ढिराज चतुर्थी पर पूजा विधि

इस दिन विशेष पूजा विधि का पालन करना चाहिए। सूर्योदय से पूर्व स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें। गणेश जी की मूर्ति को पंचामृत से स्नान कराएं और 21 दूर्वा की गांठें अर्पित करें। मोदक या बेसन के लड्डू का भोग लगाएं।


ढुण्ढिराज चतुर्थी से जुड़ी पौराणिक कथा

एक बार भगवान शिव ने गणेश जी को काशी भेजा ताकि राजा दिवोदास की तपस्या को भंग किया जा सके। गणेश जी ने राजा को वैराग्य की ओर प्रेरित किया, जिससे भगवान शिव काशी लौट सके। इस दिन भक्त गणेश जी की पूजा करते हैं।


ढुण्ढिराज चतुर्थी का धार्मिक महत्व

यह पर्व भगवान गणेश के ढुण्डिराज स्वरूप की पूजा से जुड़ा है। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने से सभी मनोकामनाएँ पूरी होती हैं। यह व्रत विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभकारी है जो नई शुरुआत कर रहे हैं।