दीवाली 2023: जानें इस खास दिन की पूजा विधि और परंपराएं
दीवाली का पर्व: पूजा का महत्व
नई दिल्ली: इस वर्ष दीवाली का त्योहार 8 नवंबर, रविवार को मनाया जाएगा। इस दिन हर घर में भगवान गणेश और माता लक्ष्मी की पूजा एक साथ की जाती है। पूजा में खील और बताशे का भोग अर्पित किया जाता है, और विशेष रूप से माता लक्ष्मी के समक्ष घी का दीपक तथा गणेश जी के सामने सरसों के तेल का दीपक जलाया जाता है।
खील और बताशे का महत्व
सामान्यतः पूजा में चावल का उपयोग होता है, लेकिन दीवाली पर खील का प्रयोग किया जाता है। खील, जो कि खिली हुई धान है, घर में समृद्धि और अनाज की भरपूरता का प्रतीक है। वहीं, बताशे परिवार में मिठास बनाए रखने के लिए चढ़ाए जाते हैं, ताकि घर में सदा प्रेम बना रहे।
सरसों के तेल के दीपक से काजल बनाने की परंपरा
दिवाली की पूजा में एक विशेष परंपरा है। गणपति जी के सामने सरसों के तेल का दीपक जलाया जाता है। पूजा के बाद, इसी दीपक की लौ से एक कच्चे मिट्टी के दीये पर काजल बनाया जाता है। अगले दिन सुबह, सभी लोग, विशेषकर बच्चे, इस काजल को अपनी आंखों में लगाते हैं। मान्यता है कि यह काजल बुरी नजर से सुरक्षा प्रदान करता है और घर में गणेश जी की कृपा बनाए रखता है। इसे शुभ माना जाता है।
गणेश और लक्ष्मी के दीपक का प्रतीकात्मक महत्व
भगवान गणेश को विघ्नहर्ता कहा जाता है, जो बाधाओं को दूर करते हैं। माता लक्ष्मी धन देती हैं और गणेश जी उस धन का सही उपयोग करने की बुद्धि प्रदान करते हैं। इसलिए, उनके सामने सरसों के तेल का दीपक जलाना इस बात का प्रतीक है कि जीवन की सभी रुकावटें दूर हों और परिवार में सुख-शांति बनी रहे।