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दुर्गा पूजा 2026: तिथियाँ और विशेष अनुष्ठान

दुर्गा पूजा 2026 का पर्व पश्चिम बंगाल में भक्ति और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। इस लेख में हम आपको इस पर्व की महत्वपूर्ण तिथियों, महासप्तमी, सिंदूर खेला और विसर्जन के बारे में जानकारी देंगे। जानें कब से कब तक मनाया जाएगा यह पर्व और इसके विशेष अनुष्ठान क्या होंगे।
 

दुर्गा पूजा का महत्व

दुर्गा पूजा, जो पश्चिम बंगाल में मनाया जाता है, विश्वभर में प्रसिद्ध है। यह पर्व भक्ति, उत्साह और सामंजस्य का प्रतीक है। उत्तर भारत में मनाए जाने वाले शारदीय नवरात्रि से इसकी परंपरा भिन्न है। दुर्गा पूजा की शुरुआत आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि से होती है, जबकि नवरात्रि की शुरुआत प्रतिपदा तिथि से होती है। इस पर्व के दौरान देवी दुर्गा की पूजा षष्ठी से लेकर महानवमी तक की जाती है, और दशमी के दिन सिंदूर खेला के साथ देवी का विसर्जन किया जाता है। इस लेख में हम दुर्गा पूजा, महासप्तमी, सिंदूर खेला और विसर्जन की तिथियों की जानकारी देंगे।


दुर्गा पूजा की तिथियाँ और मुहूर्त

वैदिक पंचांग के अनुसार, आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि 16 अक्टूबर को सुबह 03:25 बजे से आरंभ हो रही है। यह तिथि 17 अक्टूबर को सुबह 05:54 बजे समाप्त होगी। इसलिए, 16 अक्टूबर को आश्विन शुक्ल षष्ठी के दिन दुर्गा पूजा का शुभारंभ होगा।


पहला दिन: कल्पारंभ

आज, 16 अक्टूबर को दुर्गा पूजा का पहला दिन है, जिसे कल्पारंभ कहा जाता है। यह पूजा कोलाबोऊ पूजा से एक दिन पहले होती है। इस दिन मां दुर्गा को कलश या बिल्व वृक्ष में निवास के लिए आमंत्रित किया जाता है। इस दिन गणेशजी, देवी दुर्गा, कार्तिकेय और देवी सरस्वती की मूर्तियों का अनावरण किया जाता है।


दूसरा दिन: महासप्तमी

दुर्गा पूजा का दूसरा दिन महासप्तमी है, जो 17 अक्टूबर को मनाया जाएगा। इस दिन नवपत्रिका पूजा या कोलाबोऊ पूजा की जाएगी, जिसके बाद मां दुर्गा के महास्नान के बाद महासप्तमी की पूजा होगी। 2026 में, सप्तमी तिथि दो दिन तक रहेगी, जिसमें 18 अक्टूबर को भी महासप्तमी मनाई जाएगी।


चौथा दिन: महाष्टमी

19 अक्टूबर 2026 को दुर्गा पूजा का महाष्टमी उत्सव मनाया जाएगा। इस दिन मां दुर्गा की विशेष पूजा की जाएगी। अष्टमी तिथि के समापन और नवमी तिथि की शुरुआत पर संधि पूजा का आयोजन होगा।


पांचवा दिन: महानवमी

इस वर्ष, 20 अक्टूबर 2026 को दुर्गा पूजा की महानवमी मनाई जाएगी। इस दिन नवमी का हवन किया जाएगा।


दुर्गा विसर्जन और सिंदूर खेला

21 अक्टूबर 2026 को दुर्गा पूजा का समापन होगा, जिसमें सिंदूर खेला का आयोजन किया जाएगा। इस दिन सुहागिन महिलाएं एक-दूसरे को सिंदूर लगाती हैं और देवी दुर्गा को विदा करती हैं। इस अवसर पर ढोल-नगाड़ों की थाप पर मां दुर्गा का विसर्जन किया जाएगा।