धनतेरस 2023: जानें इस खास दिन की पूजा विधि और शुभ मुहूर्त
धनतेरस का महत्व और पूजा
नई दिल्ली: धनतेरस का पर्व दिवाली की शुरुआत का प्रतीक है। इस दिन लोग अपने घरों की सफाई करते हैं, नए बर्तन और सोने-चांदी की वस्तुएं खरीदते हैं, और शाम को मां लक्ष्मी तथा भगवान कुबेर की पूजा करते हैं। इस वर्ष धनतेरस 6 नवंबर, शुक्रवार को मनाया जाएगा। शुक्रवार का दिन मां लक्ष्मी के लिए विशेष माना जाता है, जिससे इस बार धनतेरस का महत्व और बढ़ गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन मां लक्ष्मी और कुबेर देव की पूजा से घर में सुख-समृद्धि और धन की वृद्धि होती है। इसके साथ ही, भगवान धन्वंतरि की आराधना से स्वास्थ्य की कामना भी की जाती है।
हिंदू धर्म में शुक्रवार का दिन माता लक्ष्मी की पूजा के लिए शुभ माना जाता है। इस दिन भक्त मां लक्ष्मी से घर में समृद्धि, खुशहाली और आर्थिक संकट से मुक्ति की प्रार्थना करते हैं। धनतेरस पर लक्ष्मी और कुबेर की पूजा की परंपरा है, जिससे शुक्रवार और धनतेरस का मिलन धार्मिक दृष्टि से विशेष माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा से पूजा करने पर परिवार में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है। धनतेरस पर शाम के प्रदोष काल में पूजा करना भी शुभ माना जाता है।
धनतेरस की तिथि और शुभ मुहूर्त
इस साल त्रयोदशी तिथि 6 नवंबर को सुबह 10:30 बजे प्रारंभ होगी और 7 नवंबर को सुबह 10:47 बजे समाप्त होगी। मां लक्ष्मी की पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 6:01 बजे से 7:57 बजे तक रहेगा। प्रदोष काल शाम 5:33 बजे से रात 8:09 बजे तक और वृषभ काल शाम 6:01 बजे से 7:57 बजे तक रहेगा।
मां लक्ष्मी और कुबेर की पूजा विधि
धनतेरस पर पूजा आरंभ करने से पहले घर और मंदिर की अच्छी तरह सफाई करें। पूजा स्थल को फूलों और रंगोली से सजाएं। शाम को शुभ मुहूर्त में एक चौकी पर मां लक्ष्मी और भगवान कुबेर की तस्वीर या मूर्ति स्थापित करें। सबसे पहले भगवान गणेश का स्मरण करके पूजा शुरू करें। इसके बाद मां लक्ष्मी को रोली, अक्षत, हल्दी, लाल फूल और कमल का फूल अर्पित करें। माता को फल, मिठाई और खीर का भोग लगाएं। फिर भगवान कुबेर को फूल और अक्षत चढ़ाएं। अंत में दोनों की आरती करें और घर के मुख्य दरवाजे के साथ पूजा स्थल पर दीपक जलाएं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस विधि से पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की जाती है।