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धनतेरस 2026: जानें यम दीपदान की विधि और शुभ मुहूर्त

धनतेरस का त्योहार 6 नवंबर 2026 को मनाया जाएगा। इस दिन मां लक्ष्मी और भगवान धन्वंतरि की पूजा के साथ यमराज के नाम दीपदान करने की परंपरा है। जानें कितने दीये जलाने चाहिए, यम दीपदान की विधि और इसका शुभ मुहूर्त। इस पर्व को खास बनाने के लिए आवश्यक जानकारी प्राप्त करें।
 

धनतेरस का पर्व कब मनाया जाएगा?


नई दिल्ली: इस वर्ष धनतेरस का त्योहार 6 नवंबर 2026 को मनाया जाएगा। यह पर्व कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को आता है और इसे धन्वंतरि जयंती के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन मां लक्ष्मी, भगवान कुबेर और भगवान धन्वंतरि की पूजा के साथ-साथ सोने, चांदी और बर्तनों की खरीदारी करना भी शुभ माना जाता है। इसके अलावा, धनतेरस की शाम यमराज के नाम दीपदान करने की परंपरा भी है, जो परिवार को अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति दिलाने में सहायक मानी जाती है। यदि आप भी इस धनतेरस पर दीपदान करने की योजना बना रहे हैं, तो जानें कि कितने दीये जलाने चाहिए, यम दीपदान की विधि क्या है और इसका शुभ मुहूर्त कब है।


धनतेरस पर कितने दीये जलाने चाहिए?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, धनतेरस की शाम को घर में कुल 13 दीपक जलाना शुभ माना जाता है। इन दीपकों को विभिन्न स्थानों पर रखा जाता है। पहला दीपक यमराज के नाम से घर के मुख्य द्वार पर जलाया जाता है, और इसे दक्षिण दिशा की ओर रखना शुभ होता है।


इसके अतिरिक्त, घर के मंदिर, तुलसी के पौधे, छत, रसोई, खिड़की और पानी रखने वाली जगह पर भी दीपक जलाए जा सकते हैं। हालांकि, दीपकों की कुल संख्या 13 रखी जानी चाहिए। दीपक जलाते समय घर की सफाई और सुरक्षा का विशेष ध्यान रखना आवश्यक है।


यम दीपदान कैसे करें?

धनतेरस पर यम दीपदान की परंपरा को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन यमराज के नाम दीपक जलाने से परिवार के सदस्यों पर उनकी कृपा बनी रहती है और अकाल मृत्यु का भय दूर होता है।


यम दीपदान के लिए आटे का दीपक बनाना शुभ माना जाता है, जिसमें चार बातियां लगाई जाती हैं और सरसों का तेल डाला जाता है। शाम के प्रदोष काल में पूजा करने के बाद इस दीपक को घर की चौखट के बाहर या मुख्य द्वार के पास रखा जाता है। अपार्टमेंट में रहने वाले लोग इसे अपने मेन डोर के पास रख सकते हैं।


दीपक को साफ जगह पर रखना चाहिए और इसे अनाज या गेहूं के ऊपर भी रखा जा सकता है। दीपक जलाते समय श्रद्धा और विधि का ध्यान रखना आवश्यक है।


यम दीपदान का मंत्र क्या है?

यम दीपदान करते समय दीपक जलाने के साथ विशेष मंत्र का जाप किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस मंत्र के माध्यम से यमराज से परिवार की सुख-समृद्धि और अकाल मृत्यु से रक्षा की प्रार्थना की जाती है।


यम दीपदान मंत्र:


मृत्युना पाशदण्डाभ्यां कालेन शमया सह।


त्रयोदश्यां दीपदानात् सूर्यजः प्रीयतां मम॥


इस मंत्र का भावार्थ है कि हे सूर्य पुत्र यमराज! त्रयोदशी तिथि पर आपके लिए दीपदान किया जा रहा है। आप प्रसन्न होकर मुझे और मेरे परिवार को अकाल मृत्यु के भय से बचाएं।


धनतेरस 2026 पर यम दीपदान का शुभ मुहूर्त

धनतेरस के दिन यम दीपदान प्रदोष काल में करना शुभ माना जाता है। पंचांग के अनुसार, 6 नवंबर 2026 को यम दीपदान के लिए शुभ समय शाम 5:33 बजे से रात 6:51 बजे तक रहेगा।


इस समय के दौरान यमराज के नाम दीपक जलाकर पूजा और मंत्र जाप किया जा सकता है। इसी अवधि में घर के अन्य दीपक भी जलाए जा सकते हैं।


यम दीपदान के समय दीपक के नीचे क्या रखें?

यम दीपदान करते समय दीपक के नीचे गेहूं या थोड़े से चावल रखने की परंपरा है। इससे दीपक को स्थिर आधार मिलता है और उसे सुरक्षित तरीके से रखा जा सकता है।


दीपक ऐसी जगह रखें जहां तेज हवा न आए, ताकि वह बुझने न पाए। मुख्य द्वार पर दीपक रखते समय पर्दों, कपड़ों और ज्वलनशील वस्तुओं को उससे दूर रखें। दीपक को ऐसी जगह जलाएं जहां बच्चों या पालतू जानवरों के पहुंचने का खतरा न हो।


धनतेरस पर यम दीपदान केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं है, बल्कि यह परिवार की सुख-समृद्धि और मंगलकामना से जुड़ा पर्व भी है। श्रद्धा और सावधानी के साथ दीपदान करके इस त्योहार को खास बनाया जा सकता है।