धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि की पूजा: तिथि और विधि
धनतेरस और भगवान धन्वंतरि की पूजा
धनतेरस पूजा: धनतेरस के अवसर पर आयुर्वेद के देवता और भगवान विष्णु के अवतार भगवान धन्वंतरि की विशेष पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, कार्तिक मास की कृष्ण त्रयोदशी को समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि अमृत कलश के साथ प्रकट हुए थे, इसलिए इसे धन्वंतरि जयंती या धनत्रयोदशी भी कहा जाता है। वर्ष 2026 में यह पर्व 6 नवंबर, शुक्रवार को मनाया जाएगा। भगवान धन्वंतरि को देवताओं का चिकित्सक माना जाता है।
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, इस दिन भगवान धन्वंतरि और देवी लक्ष्मी की विधिपूर्वक पूजा करनी चाहिए। धनतेरस पर श्री सूक्तम और कनकधारा स्तोत्र का पाठ करने से घर में सुख और समृद्धि आती है।
धन्वंतरि मंत्र का जाप:
इस दिन ओम धन्वंतरि देवाय नमः का 108 बार जाप करने से स्वास्थ्य और आयु में वृद्धि होती है। मान्यता है कि इस मंत्र का जाप करने से सभी प्रकार के रोग दूर होते हैं।
मंत्र:
ॐ नमो भगवते महासुदर्शनाय वासुदेवाय धन्वंतराये: अमृतकलश हस्ताय सर्व भयविनाशाय सर्व रोगनिवारणाय त्रिलोकपथाय त्रिलोकनाथाय श्री महाविष्णुस्वरूप श्री धनवंतरी स्वरूप श्री श्री श्री औषधचक्र नारायणाय नमः॥
घी का दीपक:
भगवान धन्वंतरि की पूजा में उनकी प्रतिमा के समक्ष घी का दीपक जलाना चाहिए। उन्हें पीले या गेंदे के फूल अर्पित करें।
विशेष भोग:
भगवान धन्वंतरि को पीली मिठाई (जैसे बेसन के लड्डू या पेड़ा) या औषधीय गुणों वाली चीजों का भोग अर्पित किया जाता है। ध्यान रहे कि माता लक्ष्मी को सफेद मिठाई और कुबेर जी को सफेद नैवेद्य प्रिय है।