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नवरात्रि 2023: कलश स्थापना के शुभ मुहूर्त और पूजा विधि जानें

शारदीय नवरात्र 2023 का महापर्व आज से शुरू हो रहा है। इस दौरान मां दुर्गा की उपासना के लिए कलश स्थापना का विशेष महत्व है। जानें कलश स्थापना के लिए शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महाष्टमी-नवमी का महत्व। इस नवरात्रि में श्रद्धालुओं को अपनी परंपराओं का पालन करते हुए भक्ति और संयम के साथ पूजा करने की सलाह दी गई है।
 

नवरात्रि का महापर्व शुरू


नई दिल्ली: मां दुर्गा की आराधना का प्रमुख पर्व शारदीय नवरात्र आज, 11 अक्टूबर, रविवार से आरंभ हो रहा है। इस दौरान देशभर में शक्ति की पूजा की जाएगी। पहले दिन कलश स्थापना के साथ नवरात्र की विधिवत शुरुआत होगी। पंचांग के अनुसार, आश्विन शुक्ल प्रतिपदा तिथि 10 अक्टूबर की रात 9 बजकर 19 मिनट पर आरंभ हुई थी, जो 11 अक्टूबर की रात 9 बजकर 30 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि के कारण नवरात्र का आरंभ आज से माना जा रहा है।


कलश स्थापना के लिए शुभ मुहूर्त

नवरात्रि में कलश स्थापना का विशेष महत्व है। इसके लिए आज दो प्रमुख मुहूर्त बताए गए हैं। पहला मुहूर्त सुबह 6 बजकर 19 मिनट से 10 बजकर 12 मिनट तक है, जिसे सामान्य पूजा के लिए उत्तम माना गया है। दूसरा अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 44 मिनट से दोपहर 12 बजकर 31 मिनट तक रहेगा।


हालांकि, हर शहर का सूर्योदय अलग होता है, इसलिए पंचांग में समय में थोड़ा अंतर हो सकता है। श्रद्धालुओं को सलाह दी जाती है कि वे अपने शहर के स्थानीय पंचांग के अनुसार ही घटस्थापना करें।


चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग का संयोग

इस बार नवरात्र के पहले दिन चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग का संयोग भी बन रहा है। चित्रा नक्षत्र 10 अक्टूबर की रात 9 बजकर 42 मिनट से 11 अक्टूबर की रात 10 बजकर 32 मिनट तक रहेगा। वहीं, वैधृति योग 10 अक्टूबर की रात 10 बजकर 2 मिनट से 11 अक्टूबर की रात 9 बजकर 5 मिनट तक रहेगा। कई विद्वान इस योग में कलश स्थापना को लेकर सावधानी बरतने की सलाह देते हैं, इसलिए अभिजीत मुहूर्त को अधिक शुभ माना जा रहा है।


घटस्थापना की विधि

सुबह स्नान करने के बाद पूजा स्थल की सफाई करें। चौकी पर लाल या पीला वस्त्र बिछाकर मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित करें। एक मिट्टी के पात्र में जौ बोएं। कलश में गंगाजल भरकर उसमें अक्षत, सुपारी और सिक्का डालें। कलश के मुख पर आम के पत्ते लगाकर ऊपर नारियल रखें और फिर दीप जलाकर गणेश जी और मां दुर्गा का आह्वान करें।


महाष्टमी और महानवमी का महत्व

नवरात्र में महाष्टमी और महानवमी का विशेष महत्व होता है। इस वर्ष महाष्टमी 18 अक्टूबर, रविवार को और महानवमी 19 अक्टूबर, सोमवार को है। इसी दिन हवन और कन्या पूजन किया जाएगा। व्रत रखने वाले लोग अपनी परंपरा के अनुसार अष्टमी या नवमी को कन्या पूजन के बाद व्रत खोलते हैं। व्रत पारण का समय स्थानीय पंचांग देखकर ही तय करें। नवरात्र के नौ दिन भक्ति और संयम के होते हैं। इस दौरान साफ-सफाई, सात्विक भोजन और दुर्गा सप्तशती के पाठ पर विशेष ध्यान दें।