नवरात्रि के पांचवे दिन मां स्कंदमाता की पूजा: जानें विधि और महत्व
मां स्कंदमाता की आराधना का महत्व
नई दिल्ली: शारदीय नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा का विशेष महत्व है। नवरात्रि के पांचवे दिन मां दुर्गा के पांचवे रूप, मां स्कंदमाता की पूजा की जाती है। इस वर्ष, 15 अक्टूबर 2026 को पंचमी तिथि पर मां स्कंदमाता की आराधना की जाएगी। यह स्वरूप ममता, प्रेम और वात्सल्य का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, मां की श्रद्धापूर्वक पूजा करने से भक्त अपने परिवार के लिए सुख-शांति और समृद्धि की कामना करते हैं। इस दिन मां को केले का भोग अर्पित करने की परंपरा भी है।
मां स्कंदमाता का परिचय
मां स्कंदमाता का नाम उनके पुत्र भगवान स्कंद, जिन्हें कार्तिकेय भी कहा जाता है, के नाम पर रखा गया है। भगवान कार्तिकेय को देवताओं का सेनापति माना जाता है। मां स्कंदमाता की चार भुजाएं हैं और उनकी गोद में भगवान कार्तिकेय बाल रूप में विराजमान रहते हैं। देवी के दो हाथों में कमल के फूल हैं, जबकि एक हाथ से वह भक्तों को आशीर्वाद देती हैं। उनका वाहन सिंह है, और कमल पर विराजमान होने के कारण उन्हें पद्मासना देवी भी कहा जाता है। भक्त मां से अपने बच्चों के उज्ज्वल भविष्य और परिवार में सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।
मां स्कंदमाता को भोग अर्पित करने की विधि
केले का भोग अर्पित करें
नवरात्रि के पांचवे दिन मां स्कंदमाता को केला अर्पित करना शुभ माना जाता है। इसके साथ ही, पूजा में अन्य ताजे फल, मिठाई और सात्विक पकवान भी चढ़ाए जा सकते हैं। भोग तैयार करते समय साफ-सफाई का ध्यान रखना आवश्यक है। पूजा के बाद प्रसाद को परिवार के सदस्यों और अन्य भक्तों में बांट सकते हैं।
मां स्कंदमाता की पूजा विधि
पूजा की विधि
पंचमी के दिन, सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें और पूजा स्थल को स्वच्छ करें। मां दुर्गा के सामने दीपक जलाकर मां स्कंदमाता का ध्यान करें। इसके बाद देवी को फूल, अक्षत, रोली और चंदन अर्पित करें। मां को केले का भोग लगाएं और श्रद्धापूर्वक उनके मंत्र का जाप करें। पूजा के दौरान दुर्गा चालीसा या मां की स्तुति का पाठ भी किया जा सकता है। अंत में, मां स्कंदमाता की आरती करें और परिवार की सुख-शांति के लिए प्रार्थना करें।