☰
×

नवरात्रि के बाद जौ का उपयोग: विसर्जन से लेकर घर में रखने तक के उपाय

नवरात्रि के बाद जौ का उपयोग एक महत्वपूर्ण धार्मिक परंपरा है। भक्तों के लिए यह जानना आवश्यक है कि पूजा में उपयोग किए गए जौ का क्या किया जाए। इस लेख में हम जौ के विसर्जन, उसे पेड़ के नीचे रखने, तिजोरी में रखने और अन्य उपायों के बारे में चर्चा करेंगे। जानें कि कैसे जौ को सही तरीके से उपयोग किया जा सकता है और इसके पीछे की धार्मिक मान्यताएं क्या हैं।
 

नवरात्रि के बाद जौ का महत्व


नई दिल्ली. माता दुर्गा की आराधना के नौ दिनों के बाद भक्तों में एक उदासी का माहौल है। जब माता के नौ रूपों की पूजा समाप्त होती है, तो विदाई के समय आंखों में आंसू आ जाते हैं। नवरात्रि के पहले दिन मां दुर्गा की पूजा के साथ कलश की स्थापना की जाती है और अखंड ज्योति प्रज्वलित की जाती है। इस दौरान जौ बोने की परंपरा भी होती है, जिसे धार्मिक मान्यता के अनुसार शुभ माना जाता है। भक्त नौ दिनों तक जौ की देखभाल करते हैं और उनकी पूजा करते हैं।


जौ का हरा, लंबा और सीधा उगना शुभ संकेत माना जाता है। यदि जौ का रंग पीला, काला या ठीक से न बढ़े, तो इसे अशुभ माना जाता है। जौ की वृद्धि पर मिट्टी, पानी और रोशनी जैसे प्राकृतिक तत्वों का प्रभाव पड़ता है। नवरात्रि के बाद, दशहरा आने पर भक्तों के मन में यह सवाल उठता है कि पूजा में उपयोग किए गए जौ का क्या किया जाए। आइए जानते हैं कि धार्मिक परंपराओं के अनुसार नवरात्रि के बाद जौ का उपयोग कैसे किया जा सकता है।


1. पवित्र जल में विसर्जन

नवरात्रि के अंतिम दिन मां दुर्गा की विधिपूर्वक पूजा करें। इसके बाद कलश और जौ को पूजा में शामिल करते हुए दीपक दिखाएं। पूजा के दौरान मां दुर्गा से अनजाने में हुई भूल के लिए क्षमा मांगें। इसके बाद श्रद्धा से जौ को उठाकर किसी स्वच्छ नदी या तालाब में विसर्जित करें। विसर्जन करते समय जल स्रोत को प्रदूषित न करने का ध्यान रखें।


2. पीपल या बरगद के पेड़ के नीचे रखें जौ

यदि आपके आस-पास नदी या तालाब नहीं है, तो जौ को किसी पेड़ के नीचे मिट्टी में रख सकते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, पीपल और बरगद के पेड़ को विशेष महत्व दिया जाता है। इसके अलावा, जौ को घर के बगीचे या बड़े गमले की मिट्टी में दबा सकते हैं, जिससे जौ प्राकृतिक रूप से मिट्टी में मिल जाएंगे।


3. हरे जौ को तिजोरी में रखने की परंपरा

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जौ को सुख-समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। इसलिए, कुछ लोग जौ की हरी पत्तियों को लाल कपड़े में बांधकर तिजोरी या धन रखने के स्थान पर रखते हैं। ऐसा करने से घर में धन-धान्य की बरकत बनी रहती है। हालांकि, यह एक आस्था से जुड़ा उपाय है, और इसके परिणाम की कोई वैज्ञानिक गारंटी नहीं है।


4. घर के मुख्य द्वार पर बांधना

कुछ परिवारों में नवरात्रि के बाद जौ को कलावे या मौली से बांधकर घर के मुख्य द्वार पर टांगने की परंपरा है। इसे शुभता और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। यदि आप भी इस परंपरा का पालन करना चाहते हैं, तो जौ को साफ करके सुखा लें और फिर मुख्य द्वार पर बांधें।


5. दशहरे पर कान के पीछे जौ रखने की परंपरा

कुछ क्षेत्रों में विजयादशमी के दिन परिवार के पुरुष सदस्य और बच्चे जौ के कुछ तिनके कान के पीछे रखते हैं। इसे शुभता, अच्छे स्वास्थ्य और सौभाग्य से जोड़ा जाता है। यह परंपरा घर में सुख-समृद्धि की कामना के साथ निभाई जाती है। हालांकि, विभिन्न क्षेत्रों और परिवारों में इस परंपरा को मनाने के तरीके भिन्न हो सकते हैं।


नवरात्रि के बाद जौ के साथ ध्यान रखने योग्य बातें
























जरूरी बात क्या ध्यान रखें?
कूड़ेदान में न फेंकें धार्मिक मान्यता के अनुसार, पूजा में उगाए गए जौ को देवी का प्रसाद मानकर सम्मानपूर्वक विसर्जित करें।
गंदे स्थान पर न डालें जौ को ऐसी जगह रखें, जहां उनकी अनदेखी न हो और लोग उन पर पैर न रखें।
जलस्रोत को स्वच्छ रखें जौ का विसर्जन करते समय नदी या तालाब को प्रदूषित करने से बचें।
मिट्टी में दबाएं विसर्जन की उचित व्यवस्था न होने पर जौ को गमले या बगीचे की मिट्टी में मिला सकते हैं।