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नाग पंचमी पर गुड़िया पीटने की अनोखी परंपरा

नाग पंचमी के अवसर पर उत्तर प्रदेश में एक अनोखी परंपरा देखने को मिलती है, जिसमें कपड़े की गुड़िया को डंडे से पीटा जाता है। यह रस्म एक भाई और बहन की कहानी से जुड़ी है, जिसमें बहन ने अपने भाई को बचाने के लिए सांप को मारा। जानें इस परंपरा का महत्व और इसके पीछे की लोककथा के बारे में।
 

नाग पंचमी का त्योहार

आज, 17 अगस्त 2026 को, नाग पंचमी का पर्व मनाया जा रहा है। इस दिन नाग देवता की पूजा का महत्व है, लेकिन उत्तर प्रदेश के कुछ क्षेत्रों में एक विशेष लोक परंपरा भी देखने को मिलती है, जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं।


गुड़िया पीटने की रस्म

नाग पंचमी के अवसर पर कपड़े की गुड़िया बनाई जाती है, जिसे डंडे से पीटने की परंपरा निभाई जाती है। यह रस्म विशेष रूप से बुंदेलखंड और गोंड़ा, कानपुर, बलरामपुर, अयोध्या और बहराइच जैसे क्षेत्रों में प्रचलित है। इस दिन बच्चे या भाई गुड़िया को डंडे से पीटते हैं।


भाई-बहन की कहानी

इस रस्म के पीछे एक लोककथा है, जिसमें एक भाई और उसकी बहन की कहानी है। कहा जाता है कि एक समय में एक लड़का भगवान शिव का भक्त था, जो नियमित रूप से मंदिर जाता था। वहां एक सांप भी रहता था, जो लड़के को कोई नुकसान नहीं पहुंचाता था।


बहन का डर

एक दिन लड़का अपनी बहन को मंदिर ले गया। पूजा के बाद, जब वे जाने लगे, तो सांप ने लड़के के पैर में लिपट गया। बहन ने यह देखकर डरकर डंडा उठाया और सांप को पीट दिया, जिससे उसकी मौत हो गई।


गुड़िया को मिली सजा

गांव वालों ने समझा कि बहन ने जानबूझकर ऐसा नहीं किया। इसलिए, उन्होंने गुड़िया बनाई और उसे डंडे से पीटने की रस्म निभाई। इस दिन से नाग पंचमी पर गुड़िया पीटने की परंपरा शुरू हुई।


गुड़िया का प्रतीकात्मक महत्व

गुड़िया का उपयोग इस कहानी में एक प्रतीक के रूप में किया जाता है। समय के साथ, यह रस्म स्थानीय परंपरा का हिस्सा बन गई है।


नाग पंचमी का संबंध

यह रस्म सांप की मौत की कहानी से जुड़ी है, और नाग पंचमी पर नागों के प्रति सम्मान और पूजा का विशेष महत्व है।


गुड़िया बनाने की प्रक्रिया

गुड़िया बनाने के बाद, नाग पंचमी के दिन इसे डंडे से पीटने की रस्म निभाई जाती है। कुछ स्थानों पर, रस्म पूरी होने के बाद गुड़ियों को पानी में बहाने या विसर्जित करने की परंपरा भी है।