निर्जला एकादशी: महत्व, पूजा विधि और दान का महत्व
निर्जला एकादशी, जो 25 मई को मनाई जाएगी, एक महत्वपूर्ण धार्मिक पर्व है। इसे आत्मशुद्धि और भक्ति का प्रतीक माना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त करने के लिए पूजा और दान का महत्व है। जानें इस पर्व की पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और दान की सामग्रियों के बारे में। यह व्रत सभी एकादशी व्रतों में सबसे फलदायी माना जाता है।
Jun 24, 2026, 18:56 IST
निर्जला एकादशी का महत्व
25 मई को निर्जला एकादशी का व्रत मनाया जाएगा, जो कि सनातन धर्म में ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि पर आता है। इसे अत्यंत पुण्यदायी और शुभ माना जाता है। यह पर्व आत्मशुद्धि, संयम, भक्ति और दान का प्रतीक है, और इस दिन भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है। आइए, जानते हैं निर्जला एकादशी के महत्व और पूजा विधि के बारे में।
निर्जला एकादशी के बारे में जानकारी
धार्मिक मान्यता के अनुसार, निर्जला एकादशी का व्रत रखने से जीवन के बड़े संकट दूर होते हैं और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है। वर्ष 2026 में यह व्रत 25 जून को मनाया जाएगा। इस वर्ष की विशेषता यह है कि इस दिन शुभ रवि योग का संयोग भी बन रहा है, जो पूजा-पाठ के लिए अत्यंत लाभकारी होता है। पंडितों का मानना है कि इस योग में पूजा करने से साधक को इच्छित फल प्राप्त होते हैं। हालांकि, सभी सामग्रियों के साथ पूजा करना शुभ माना जाता है।
दान का महत्व
शास्त्रों के अनुसार, निर्जला एकादशी पर दान का विशेष महत्व है। दान करने से भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी प्रसन्न होते हैं, जिससे दरिद्रता का नाश होता है और घर में सुख-समृद्धि का आगमन होता है। इस दिन जल दान को महादान माना गया है। जल से भरा घड़ा मंदिर या गरीबों में दान करने से धन के मार्ग खुलते हैं और जीवन में सुख-शांति बनी रहती है।
निर्जला एकादशी का शुभ मुहूर्त
पंडितों के अनुसार, निर्जला एकादशी पर पूजा के लिए शुभ मुहूर्त सुबह 05:25 ए एम से 07:10 ए एम तक है। इसके अलावा, लाभ-उन्नति मुहूर्त 12:24 पी एम से 02:09 पी एम तक है। ब्रह्म मुहूर्त 04:05 ए एम से 04:45 ए एम और अभिजीत मुहूर्त 11:56 ए एम से 12:52 पी एम तक है।
पारण का समय
निर्जला एकादशी का पारण 26 जून को होगा, जो सुबह 05:25 ए एम से 08:13 ए एम के बीच किया जा सकता है। द्वादशी तिथि का समापन रात 10:22 पी एम पर होगा।
भक्तों की प्रतीक्षा
पंडितों के अनुसार, निर्जला एकादशी का व्रत सभी एकादशी व्रतों में सबसे फलदायी होता है। जो व्यक्ति पूरे वर्ष की सभी एकादशी व्रत नहीं कर सकता, वह केवल निर्जला एकादशी का व्रत करके सभी 24 एकादशी व्रतों का पुण्य प्राप्त कर सकता है।
निर्जला एकादशी पर दान की सामग्रियाँ
पंडितों के अनुसार, पूजा के दौरान भगवान विष्णु की मूर्ति, पीले पुष्प, मौसमी फल, पंचमेवा, जल से भरा कलश, नारियल, तुलसी दल, और अन्य सामग्रियाँ दान के लिए विशेष मानी जाती हैं।
धार्मिक महत्व
निर्जला एकादशी को भीमसेनी एकादशी भी कहा जाता है। महाबली भीमसेन ने इस दिन व्रत रखा था, जिससे इसे यह नाम मिला। यह व्रत कठिन है, लेकिन इसके पुण्य प्रभाव भी महान हैं।