बगलामुखी जयंती: पूजा विधि और महत्व
बगलामुखी जयंती का महत्व
हिंदू धर्म में बगलामुखी जयंती का विशेष स्थान है। मां बगलामुखी, जो दस महाविद्याओं में से आठवीं हैं, देवी पूजा और तंत्र साधना के लिए प्रसिद्ध हैं। इस पर्व का आयोजन वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन माता ने ब्रह्मांड को विनाश से बचाने के लिए प्रकट हुई थीं। इस वर्ष, यह पावन पर्व 24 अप्रैल को मनाया जा रहा है। आइए जानते हैं मां बगलामुखी की पूजा कैसे करें।
पूजा मुहूर्त
- पुष्य नक्षत्र: 24 अप्रैल 2026 को रात 8:15 बजे तक।
- रवि योग: 24 अप्रैल 2026 को रात 8:14 बजे से 25 अप्रैल को सुबह 6:14 बजे तक।
- अभिजित मुहूर्त: दोपहर 12:11 बजे से 1:02 बजे तक।
- विजय मुहूर्त: दोपहर 2:44 बजे से 3:35 बजे तक।
- अमृत काल: 2:01 बजे से 3:35 बजे तक।
मां बगलामुखी की पूजा विधि
मां बगलामुखी को 'पीतांबरा' कहा जाता है, इसलिए उनकी पूजा में पीले रंग का विशेष महत्व है।
स्नान के बाद पीले वस्त्र पहनें।
हाथ में जल और पीले फूल लेकर पूजा का संकल्प लें।
एक चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर मां बगलामुखी की मूर्ति या यंत्र स्थापित करें।
माता को पीले अक्षत, हल्दी का तिलक, पीले फूल और पीली मिठाई अर्पित करें।
इसके बाद शुद्ध घी का दीपक जलाएं।
अंत में आरती करें और पूजा में हुई सभी गलतियों के लिए माता से क्षमा मांगें।
पूजा मंत्र
ॐ ह्लीं बगलामुखि सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तंभय जिह्वां कीलय बुद्धिं विनाशय ह्लीं ॐ स्वाहा।
मां का प्रिय भोग
मां बगलामुखी को पीला रंग प्रिय है, इसलिए उन्हें बेसन के लड्डू, केसरिया हलवा या पीले चावल का भोग अर्पित किया जा सकता है। इसके अलावा, चने की दाल चढ़ाना भी शुभ माना जाता है।
मां बगलामुखी की आरती
जय जय श्री बगलामुखी माता, आरति करहुं तुम्हारी।
पीत वसन तन पर तव सोहै, कुण्डल की छबि न्यारी।
कर-कमलों में मुद्गर धारै, अस्तुति करहिं सकल नर-नारी।
जय जय श्री बगलामुखी माता...
चम्पक माल गले लहरावे, सुर नर मुनि जय जयति उचारी।
त्रिविध ताप मिटि जात सकल सब, भक्ति सदा तव है सुखकारी।
जय जय श्री बगलामुखी माता...
पालत हरत सृजत तुम जग को, सब जीवन की हो रखवारी।
मोह निशा में भ्रमत सकल जन, करहु हृदय महं, तुम उजियारी।
जय जय श्री बगलामुखी माता...
तिमिर नशावहु ज्ञान बढ़ावहु, अम्बे तुमही हो असुरारी।
सन्तन को सुख देत सदा ही, सब जन की तुम प्राण पियारी।
जय जय श्री बगलामुखी माता...
तव चरणन जो ध्यान लगावै, ताको हो सब भव-भयहारी।
प्रेम सहित जो करहिं आरती, ते नर मोक्षधाम अधिकारी।
जय जय श्री बगलामुखी माता...
दोहा
बगलामुखी की आरती, पढ़ै सुनै जो कोय।
विनती कुलपति मिश्र की, सुख-सम्पति सब होय।