बरसाना की लठामार होली: प्रेम और रंगों का अद्भुत उत्सव
बरसाना की लठामार होली एक अद्भुत उत्सव है, जो प्रेम और रंगों से भरा होता है। इस परंपरा में नंदगांव के पुरुष और बरसाना की महिलाएं मिलकर होली खेलते हैं। जानें इस विशेष त्योहार की तिथियाँ, परंपराएँ और इसके पीछे की कहानियाँ।
Feb 23, 2026, 19:40 IST
बरसाना की होली का विशेष महत्व
होली का पर्व रंगों और उल्लास का प्रतीक है। इस त्योहार में ब्रज की होली विशेष रूप से प्रसिद्ध है। बरसाना की लठामार होली, फूलों की होली और लड्डू की होली का नाम सुनते ही मन में उत्साह भर जाता है। यह पारंपरिक होली राधा रानी और भगवान कृष्ण के प्रेम और उनकी लीलाओं पर आधारित है।
लठामार होली का अनोखा खेल
फाल्गुन मास में बरसाना की गलियों में होने वाले इस उत्सव में नंदगांव के पुरुष (हुरियारे) बरसाना की महिलाओं (हुरियारिनों) पर रंग डालते हैं। इसके जवाब में महिलाएं मजाक में लाठियों से उन्हें पीटती हैं, जिससे पुरुष अपनी ढाल से बचते हैं। इस खेल का आनंद सभी लेते हैं।
लठामार होली की तिथि
इस वर्ष, 26 फरवरी को बरसाना की महिलाएं नंदगांव के होरियारों के साथ लठामार होली का आनंद लेंगी। इस परंपरा को समझने के लिए राधा रानी के प्रति गहरी श्रद्धा और प्रेम का होना आवश्यक है। बरसाना को राधा रानी की जन्मभूमि माना जाता है, जो उनकी दिव्य लीलाओं का स्थल है।
प्रेम की डोर में बंधा उत्सव
बरसाना की लठामार होली विश्वभर में प्रसिद्ध है। यह प्रेम की एक अद्भुत डोर है, जो हर फागुन में भक्तों को प्रेम में भिगोती है। शिवरात्रि के दिन से ही लोग भक्ति और प्रेम में नाचते-गाते हुए होली का स्वागत करते हैं।
विशेष आमंत्रण
नंदगांव के पुरुषों को बरसाना की महिलाओं द्वारा होली खेलने के लिए आमंत्रित किया जाता है। इस अवसर पर टेसू और पलाश के फूलों से बने रंगों का उपयोग किया जाता है। कहा जाता है कि फागुन में नंदगांव से होरियारों की ओर से बरसाना की होरियारिनों के लिए देसी घी भेजा जाता है, जिससे वे ताकत से लाठियां चला सकें।