बैसाखी: फसल उत्सव और सूर्य की नई शुरुआत
बैसाखी का त्योहार सूर्य के मेष राशि में प्रवेश के साथ मनाया जाता है, जो फसल कटाई का उत्सव है। यह दिन सिख नववर्ष का प्रतीक भी है, जिसमें लोग एकत्रित होकर अच्छी फसल के लिए ईश्वर का धन्यवाद करते हैं। ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास के अनुसार, इस साल बैसाखी 14 अप्रैल को मनाई जाएगी। इस दिन का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है, और इसे नए साल की शुरुआत के रूप में देखा जाता है।
Apr 13, 2026, 18:02 IST
बैसाखी का महत्व
जब सूर्यदेव मेष राशि में प्रवेश करते हैं, तब बैसाखी का त्योहार मनाया जाता है। इसे मेष संक्रांति और वैशाख संक्रांति के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन सूर्य देवता की पूजा और दान का विशेष महत्व होता है। किसान इस अवसर पर अपनी फसलों की कटाई की खुशी में बैसाखी का जश्न मनाते हैं। ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास के अनुसार, बैसाखी के समय रबी की फसल तैयार हो जाती है, जिससे किसान इसे धूमधाम से मनाते हैं। इस दिन सूर्य का मेष राशि में प्रवेश होना इसे विशेष बनाता है। बैसाखी को नए साल के रूप में भी देखा जाता है।
बैसाखी का पर्व
ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास ने बताया कि बैसाखी को फसल के उत्सव के रूप में मनाया जाता है। यह मुख्य रूप से पंजाब और हरियाणा में मनाया जाता है, जहां लोग नाचते और गाते हैं। बैसाखी सिख नववर्ष का प्रतीक है और इसका धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व है। इस दिन लोग एकत्रित होकर अच्छी फसल के लिए ईश्वर का धन्यवाद करते हैं।
बैसाखी 2026
भविष्यवक्ता डा. अनीष व्यास के अनुसार, इस साल बैसाखी का त्योहार 14 अप्रैल, मंगलवार को मनाया जाएगा। इस दिन वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि है। सुबह 9:31 बजे सूर्य मेष राशि में प्रवेश करेंगे। इस दिन पुण्य काल सूर्योदय से लेकर शाम 3:55 बजे तक रहेगा।
मेष संक्रांति का प्रभाव
डा. अनीष व्यास ने बताया कि यह महोदरी नामक संक्रांति होगी, जिसके कारण सोने और चांदी की कीमतों में वृद्धि हो सकती है। इसके अलावा, तेल, घी और दैनिक उपयोग की वस्तुओं की कीमतें भी बढ़ सकती हैं, जिससे आम लोगों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।
वैशाख संक्रांति का महत्व
इस दिन सूर्य देवता की पूजा का विशेष महत्व है। किसान फसलों की कटाई की खुशी में बैसाखी का त्योहार मनाते हैं। स्नान-दान का भी इस दिन विशेष महत्व है, जिससे शुभ फल की प्राप्ति होती है। बैसाखी को नए साल के रूप में मनाने का कारण भी यही है। इस दिन लोग अपने घरों की सफाई करते हैं और रंगोली बनाते हैं। बैसाखी पर विभिन्न पकवान बनाए जाते हैं और सिख समुदाय के लोग गुरुद्वारे जाते हैं।