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भानु सप्तमी: सूर्य देव की पूजा का महत्व और विधि

भानु सप्तमी का व्रत सूर्य देव को समर्पित है, जो हर महीने की सप्तमी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन की पूजा विधि और महत्व के बारे में जानें। मान्यता है कि इस दिन सूर्य देव की आराधना से जीवन में सुख, समृद्धि और सफलता का आगमन होता है। जानें इस दिन का मुहूर्त और पूजा विधि, जिससे आप इस पावन अवसर का लाभ उठा सकें।
 

भानु सप्तमी का महत्व

हिंदू धर्म में भानु सप्तमी का एक विशेष स्थान है। यह व्रत सूर्य देव को समर्पित होता है और हर महीने की शुक्ल या कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन सूर्य देव की पूजा करने से व्यक्ति के जीवन में सुख, समृद्धि, और सफलता का आगमन होता है। इस लेख में हम इस दिन के मुहूर्त, पूजा विधि और इसके महत्व के बारे में जानकारी साझा करेंगे।


तिथि और मुहूर्त

वैदिक पंचांग के अनुसार, 20 जून 2026 को दोपहर 02:47 बजे से सप्तमी तिथि की शुरुआत होगी। यह तिथि 21 जून 2026 को दोपहर 03:21 बजे समाप्त होगी। इसलिए, उदयातिथि के अनुसार, भानु सप्तमी का व्रत 21 जून 2026 को मनाया जाएगा।


पूजन विधि

इस दिन सुबह जल्दी स्नान करने के बाद स्वच्छ वस्त्र पहनें। फिर एक तांबे के लोटे में जल भरकर उसमें अक्षत, रोली, लाल फूल और गुड़ या मिश्री मिलाएं। उगते सूर्य को जल अर्पित करते समय 'ऊँ सूर्याय नम:' मंत्र का जाप करें। सूर्य देव को अर्घ्य देने के बाद तीन बार उनकी परिक्रमा करें। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन आदित्य हृदय स्त्रोत का पाठ करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इसके अलावा, जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और अन्य उपयोगी वस्तुओं का दान करने से पुण्य फल की प्राप्ति होती है।


महत्व

पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस दिन सूर्य देव अपने सात घोड़ों वाले दिव्य रथ पर प्रकट हुए थे, जिससे पृथ्वी पर प्रकाश फैल गया। ज्योतिष शास्त्र में सूर्य को आत्मबल, नेतृत्व क्षमता, प्रतिष्ठा, स्वास्थ्य और पिता का कारक ग्रह माना जाता है। भानु सप्तमी के अवसर पर सूर्य देव की पूजा करने से जातक को रोगों से मुक्ति, आत्मविश्वास में वृद्धि, और जीवन में उन्नति के मार्ग खुलने की मान्यता है।