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मत्स्य जयंती 2026: पूजा विधि, तिथि और महत्व

मत्स्य जयंती 2026, भगवान श्रीहरि विष्णु के पहले अवतार का उत्सव है। इस दिन भक्तजन विशेष पूजा विधियों का पालन करते हैं। जानें इस दिन की तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा की विधि। साथ ही, जानें इस पर्व का धार्मिक महत्व और कैसे यह जीवन में सुख और समृद्धि लाता है।
 

मत्स्य अवतार का महत्व

भगवान श्रीहरि विष्णु का मत्स्य अवतार उनके पहले अवतार के रूप में जाना जाता है। यह घटना सतयुग में हुई थी, जब भगवान ने मछली के रूप में प्रकट होकर जल प्रलय से राजा सत्यव्रत, प्रजापतियों और सप्तऋषियों की रक्षा की थी। मत्स्य जयंती के अवसर पर भक्तजन व्रत रखते हैं और भगवान विष्णु के इस अवतार की विधिपूर्वक पूजा करते हैं। इस दिन भगवान विष्णु के सहस्त्रनाम स्तोत्र का पाठ करना भी शुभ माना जाता है। इस वर्ष, मत्स्य जयंती 21 मार्च 2026 को मनाई जाएगी। आइए जानते हैं इस दिन की तिथि, मुहूर्त, पूजा विधि और इसके महत्व के बारे में...


तिथि और मुहूर्त

चैत्र माह की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 21 मार्च की रात 02:30 बजे से प्रारंभ होगी और इसका समापन उसी दिन रात 11:56 बजे होगा। इस प्रकार, उदयातिथि के अनुसार 21 मार्च 2026 को मत्स्य जयंती मनाई जाएगी। पूजा का शुभ मुहूर्त दोपहर 01:41 बजे से लेकर शाम 04:07 बजे तक रहेगा।


पूजन विधि

इस दिन भक्तजन सुबह जल्दी स्नान करके व्रत का संकल्प लेते हैं। इसके बाद, गंगाजल से मंदिर को पवित्र किया जाता है और लकड़ी की चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र स्थापित किया जाता है। फिर, भगवान विष्णु के मत्स्य अवतार का ध्यान करते हुए पीले फूल, तुलसी और प्रसाद अर्पित किया जाता है। इस दिन 'ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय नम:' मंत्र का जाप करना चाहिए। साथ ही, गरीबों को दान देना और जरूरतमंदों की सहायता करना भी महत्वपूर्ण है। यदि संभव हो, तो विष्णु सहस्त्रनाम स्तोत्र का पाठ अवश्य करें।


महत्व

हिंदू धर्म के अनुसार, जब पृथ्वी पर प्रलय का संकट आया था, तब भगवान विष्णु ने मत्स्य का रूप धारण किया। इस अवतार के माध्यम से उन्होंने राजा सत्यव्रत को जीवन और सृष्टि के संरक्षण का मार्ग दिखाया। इस दिन व्रत, पूजा और दान करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का आगमन होता है।