महालक्ष्मी व्रत: सुख-समृद्धि और धन की प्राप्ति का मार्ग
महालक्ष्मी व्रत का महत्व
मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने और घर में सुख, समृद्धि तथा धन की वृद्धि के लिए महालक्ष्मी व्रत को अत्यंत फलदायी माना जाता है। यह व्रत 15 दिनों तक चलता है, जिसमें धन की देवी की विधिपूर्वक पूजा की जाती है। महालक्ष्मी व्रत से घर-परिवार में सुख-समृद्धि का वास होता है। यह व्रत 19 सितंबर से आरंभ होकर 03 अक्टूबर तक चलेगा। व्रत के पहले दिन कलश स्थापना का विशेष महत्व है। आइए, महालक्ष्मी व्रत की तिथि, कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि के बारे में विस्तार से जानते हैं।
तिथि और मुहूर्त
वैदिक पंचांग के अनुसार, महालक्ष्मी व्रत के लिए 18 सितंबर को दोपहर 01:00 बजे से भाद्रपद माह के शुक्ल अष्टमी तिथि की शुरुआत हुई है, जो आज यानी 19 सितंबर को दोपहर 03:26 बजे तक रहेगी। उदयातिथि के अनुसार, महालक्ष्मी व्रत 19 सितंबर 2026 से प्रारंभ होगा।
कलश स्थापना का मुहूर्त
महालक्ष्मी व्रत मां लक्ष्मी को समर्पित है। यह माना जाता है कि जो व्यक्ति इस व्रत को श्रद्धा और नियम से करता है, उसे मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है और उसके घर में सुख-समृद्धि और शांति बनी रहती है।
प्रातःकाल का मुहूर्त: सुबह 04:57 से 06:08 बजे तक।
दूसरा शुभ मुहूर्त: सुबह 07:40 से 09:11 बजे तक।
मध्याह्न का शुभ मुहूर्त: सुबह 11:01 से दोपहर 01:28 बजे तक।
कलश स्थापना की विधि
इस दिन सुबह जल्दी स्नान करने के बाद पूजा स्थल की सफाई करें और गंगाजल का छिड़काव करें। फिर एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर उस पर मां लक्ष्मी की तस्वीर स्थापित करें। एक तांबे के कलश में साफ जल भरें और उसमें सिक्का तथा अक्षत डालें। कलश के ऊपरी भाग पर आम के पत्ते रखें और उसके मुंह पर नारियल रखें। अंत में, कलश पर रोली और कुमकुम से स्वास्तिक बनाएं।
पूजन विधि
कलश स्थापना के बाद मां लक्ष्मी का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें। फिर मां लक्ष्मी को फूल, अक्षत, कुमकुम, चंदन और धूप-दीप अर्पित करें। मां लक्ष्मी को श्रृंगार की सामग्री और 16 गांठों वाला डोरा अर्पित करें। विधि-विधान और श्रद्धा के साथ मां लक्ष्मी की पूजा करें। इस दौरान श्रीसूक्त और महालक्ष्मी अष्टकम का पाठ करना शुभ माना जाता है। पूजा के अंत में मां लक्ष्मी को खीर, फल, मिठाई या पंचमेवा का भोग लगाएं और घी का दीपक जलाकर आरती करें।
महत्व
जो व्यक्ति महालक्ष्मी व्रत करता है, उसके जीवन में दरिद्रता का सामना नहीं करना पड़ता। मां लक्ष्मी की कृपा से धन संकट नहीं आता और व्यक्ति के अन्न, भोजन, धन, जमीन, भवन, प्रसिद्धि, आयु और सफलता में वृद्धि होती है।