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मां स्कंदमाता की पूजा: आज का प्रिय भोग और विधि

चैत्र नवरात्रि के इस पावन पर्व पर मां स्कंदमाता की पूजा का विशेष महत्व है। जानें कैसे मां की कृपा से संतान सुख, ज्ञान और आध्यात्मिक समृद्धि प्राप्त की जा सकती है। इस लेख में मां स्कंदमाता के प्रिय भोग और पूजा विधि के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई है। आज के दिन मां को केले का भोग अर्पित करना शुभ माना जाता है।
 

मां स्कंदमाता की कृपा से मिलती है संतान सुख और आध्यात्मिक समृद्धि


चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व इस समय चल रहा है, जो 19 मार्च से शुरू होकर 27 मार्च तक चलेगा। इस दौरान सच्चे मन से पूजा करने से पापों का नाश होता है और मां दुर्गा की कृपा से जीवन में सुख, धन और वैभव की प्राप्ति होती है। आज नवरात्रि का पांचवां दिन है, जो मां स्कंदमाता को समर्पित है।


इस दिन मां स्कंदमाता की पूजा विधिपूर्वक की जाती है। मान्यता है कि उनकी पूजा से संतान सुख, ज्ञान और आध्यात्मिक समृद्धि प्राप्त होती है। पूजा में भोग लगाना आवश्यक है, इसलिए आज मां को उनका प्रिय भोग अर्पित करें।


स्कंदमाता का स्वरूप

मां स्कंदमाता सिंह पर सवार होती हैं और उनकी गोद में भगवान कार्तिकेय विराजमान हैं। उनके चार भुजाएं हैं, जिनमें से एक हाथ वरमुद्रा में है, जबकि दो हाथों में कमल के फूल हैं और एक हाथ से वे भगवान कार्तिकेय को पकड़े हुए हैं।


मां स्कंदमाता का प्रिय भोग

धार्मिक मान्यता के अनुसार, मां स्कंदमाता को केले का भोग बहुत प्रिय है। पूजा के समय उन्हें केले का भोग अर्पित करना शुभ माना जाता है। इसके अलावा, केसर वाली खीर या पीले रंग की मिठाइयों का भोग भी लगाया जा सकता है।


स्कंदमाता की पूजा की विधि

सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और मंदिर की सफाई करें। फिर पीले वस्त्र पहनकर गंगाजल का छिड़काव करें। पूजा के दौरान मां को पीला चंदन, पीले अक्षत, पीले वस्त्र, पंचामृत, मिठाई, पीले फूल और फल अर्पित करें। घी का दीपक जलाकर मंत्रों का जाप करें और अंत में आरती करें।


मां स्कंदमाता की आरती

जय तेरी हो स्कंद माता। पांचवां नाम तुम्हारा आता।
सबके मन की जानन हारी। जग जननी सबकी महतारी।
तेरी जोत जलाता रहू मैं। हरदम तुझे ध्याता रहू मै।
कई नामों से तुझे पुकारा। मुझे एक है तेरा सहारा।
कही पहाडो पर है डेरा। कई शहरों में तेरा बसेरा।
हर मंदिर में तेरे नजारे। गुण गाए तेरे भक्त प्यारे।
भक्ति अपनी मुझे दिला दो। शक्ति मेरी बिगड़ी बना दो।
इंद्र आदि देवता मिल सारे। करे पुकार तुम्हारे द्वारे।
दुष्ट दैत्य जब चढ़ कर आए। तू ही खंडा हाथ उठाए।
दासों को सदा बचाने आयी। भक्त की आस पुजाने आयी।


स्कंदमाता के सिद्ध मंत्र

  • या देवी सर्वभूतेषु मां स्कंदमाता रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:


मां स्कंदमाता का प्रार्थना मंत्र

  • सिंहासनगता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया। शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी।
  • मां स्कंदमाता का जप मंत्र ॐ ऐं ह्रीं क्लीं स्कन्दमातायै नम:।