मिथुन संक्रांति: तिथि, महत्व और पूजा विधि
15 जून को मनाई जाने वाली मिथुन संक्रांति का महत्व और पूजा विधि जानें। इस दिन सूर्य देव का मिथुन राशि में प्रवेश होता है, जो सभी राशियों पर प्रभाव डालता है। जानें इस पर्व पर दान-पुण्य का महत्व, महापुण्य काल और विशेष उपाय, जैसे आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ। इस अवसर पर सूर्य देव की पूजा का विशेष महत्व है।
Jun 15, 2026, 12:36 IST
मिथुन संक्रांति का महत्व
आज, 15 जून को मिथुन संक्रांति का पर्व मनाया जा रहा है। यह वह समय है जब सूर्य देव मिथुन राशि में प्रवेश करते हैं, जिसे संक्रांति कहा जाता है। इस अवसर पर लोग पवित्र नदियों में स्नान करते हैं और दान-पुण्य का विशेष महत्व होता है। इस दिन सूर्य देव की पूजा का भी खास महत्व है। आइए, जानते हैं इस पर्व की तिथि, महत्व और पूजा विधि के बारे में...
तिथि और मुहूर्त
वैदिक पंचांग के अनुसार, 15 जून को दोपहर 12:59 बजे सूर्य देव मिथुन राशि में प्रवेश करेंगे। इस समय सूर्य की मिथुन संक्रांति होगी, जिसका प्रभाव सभी 12 राशियों पर पड़ता है।
महापुण्य काल
मिथुन संक्रांति पर महापुण्य काल दोपहर 12:59 बजे से शुरू होगा और यह 03:19 बजे तक चलेगा। इस महापुण्य काल की अवधि 2 घंटे 20 मिनट होगी, जबकि संक्रांति का कुल पुण्य काल 6 घंटे 21 मिनट का होगा।
दान-पुण्य का महत्व
इस दिन स्नान के बाद अन्न, जल, वस्त्र, फल और गुड़ का दान करना चाहिए। इससे सूर्य ग्रह मजबूत होता है और जातक का अपने पिता के साथ संबंध भी मजबूत होता है। इसके अलावा, नौकरी में तरक्की के अवसर भी बढ़ते हैं।
पूजन विधि
इस दिन सुबह किसी पवित्र नदी में स्नान करना चाहिए। यदि यह संभव न हो, तो घर पर गंगाजल मिलाकर स्नान करें। इसके बाद सूर्य देव का ध्यान करें और उन्हें अर्घ्य अर्पित करें। इस दिन सूर्य देव के मंत्रों का जाप करना और पितरों का ध्यान करना भी महत्वपूर्ण है। भगवान विष्णु की पूजा करना भी शुभ माना जाता है।
उपाय और लाल रंग का महत्व
सूर्य देव को लाल रंग बहुत प्रिय है। पूजा के समय उन्हें लाल वस्त्र और फूल अर्पित करें। इस दिन लाल रंग के कपड़े पहनना और चंदन का तिलक लगाना भी लाभकारी होता है, जिससे आत्मविश्वास में वृद्धि होती है।
आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ
यदि कोई व्यक्ति जीवन में बार-बार असफल हो रहा है, तो संक्रांति के दिन आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करना चाहिए। यह सूर्य देव को प्रसन्न करने का एक शक्तिशाली उपाय है, जो आत्मबल और तरक्की को बढ़ाता है।
प्रकृति की सेवा
रविवार को पीपल के वृक्ष को जल अर्पित करना चाहिए और उसकी परिक्रमा करनी चाहिए। साथ ही, घर में तुलसी के पौधे की सेवा करना भी आवश्यक है। तुलसी की सेवा से सूर्य देव प्रसन्न होते हैं और उत्तम स्वास्थ्य का वरदान मिलता है।