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यमुना छठ: महत्व, पूजा विधि और पौराणिक कथा

यमुना छठ का पर्व हर साल चैत्र माह की षष्टी तिथि को मनाया जाता है, जो यमुना नदी के अवतरण दिवस के रूप में महत्वपूर्ण है। इस वर्ष यह पर्व 24 मार्च 2026 को होगा। इस दिन यमुना जी की पूजा और व्रत का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, यमुना नदी में स्नान करने से पाप समाप्त होते हैं और जीवन में सुख-शांति आती है। जानें इस पर्व की पूजा विधि, पौराणिक कथा और इसके महत्व के बारे में।
 

यमुना छठ का पर्व

हिंदू पंचांग के अनुसार, हर वर्ष चैत्र माह की षष्टी तिथि को यमुना जयंती या यमुना छठ का महापर्व मनाया जाता है। यह पर्व यमुना नदी के अवतरण दिवस के रूप में विशेष महत्व रखता है। इस दिन यमुना जी की पूजा और व्रत का आयोजन किया जाता है। इस वर्ष यह पर्व 24 मार्च 2026 को मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार, यमुना छठ के दिन यमुना नदी में स्नान करने और पूजा करने से सभी पाप समाप्त होते हैं और जीवन में सुख-शांति का आगमन होता है। आइए, जानते हैं यमुना छठ की तिथि, मुहूर्त, पूजा विधि और इसके महत्व के बारे में...


पौराणिक कथा

हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, यमुना जी का अवतरण सूर्य देव और संज्ञा के घर हुआ था। उन्हें यमराज की बहन माना जाता है। यह मान्यता है कि यमुना जी ने जीवों के कल्याण और पापों से मुक्ति के लिए नदी के रूप में अवतार लिया। यमुना का उद्गम हिमालय की पर्वत श्रृंखलाओं से होता है। यमुना का जल पवित्र और जीवनदायी माना जाता है, जिसमें स्नान करने से सभी पाप धुल जाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है।


पूजन विधि

इस दिन प्रातः जल्दी उठकर स्नान करें। यदि संभव हो, तो यमुना नदी में स्नान करना उत्तम रहेगा। इसके बाद, साफ कपड़े पहनकर सूर्य देव को अर्घ्य दें और यमुना माता की पूजा करें। दीपक जलाएं और फल-फूल व अक्षत अर्पित करें। इसके बाद यमुना माता की स्तुति और व्रत कथा का पाठ करें। इस दिन गरीबों और जरूरतमंदों को यथासंभव दान देना भी महत्वपूर्ण है।


महत्व

धार्मिक मान्यता के अनुसार, यमुना जयंती पर व्रत और विधि-विधान से पूजा करने से जातक को पापों से मुक्ति मिलती है। इसके साथ ही आय में वृद्धि और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। यमुना छठ का पर्व भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक भी माना जाता है। इस दिन व्रत और पूजा करने से परिवार में खुशहाली आती है।