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यमुना छठ: महत्व, पूजा विधि और पौराणिक कथा

यमुना छठ का पर्व मां यमुना के अवतरण दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिन भक्तगण विशेष पूजा करते हैं और यमुना नदी में स्नान कर पुण्य अर्जित करते हैं। यमुना जी का संबंध भगवान कृष्ण से भी है, और इस दिन का धार्मिक महत्व अत्यधिक है। जानें यमुना छठ की पूजा विधि, नियम और पौराणिक कथा के बारे में।
 

यमुना छठ का महत्व

आज यमुना छठ का पर्व मनाया जा रहा है, जिसे मां यमुना के अवतरण दिवस के रूप में जाना जाता है। इस दिन विभिन्न क्षेत्रों में चैती छठ का आयोजन भी होता है। आइए, हम आपको यमुना छठ के महत्व और पूजा विधि के बारे में जानकारी देते हैं।


यमुना छठ के बारे में जानें

हिंदू धर्म में चैत्र नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा के साथ यमुना छठ या यमुना जन्मोत्सव का आयोजन किया जाता है। इस दिन मां यमुना का पृथ्वी पर अवतरण हुआ था, इसलिए इसे यमुना जयंती भी कहा जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, चैत्र शुक्ल षष्ठी के दिन मां यमुना का अवतरण हुआ था, जिससे इस दिन का महत्व बढ़ जाता है। भक्तगण इस दिन विशेष पूजा करते हैं और यमुना जी में स्नान कर पुण्य अर्जित करते हैं। हालांकि, कई बार हम अनजाने में कुछ गलतियां कर बैठते हैं, जिससे पूजा का फल नहीं मिल पाता। इसके अलावा, इस दिन छठ पर्व भी मनाया जाता है।


यमुना छठ पर गलतियों से बचें

यमुना छठ के अवसर पर लोग पूजा सामग्री, प्लास्टिक या कूड़ा-कचरा नदी में डाल देते हैं, जो शास्त्रों के अनुसार अशुभ और पाप माना जाता है। यह न केवल धार्मिक दृष्टि से गलत है, बल्कि पर्यावरण के लिए भी हानिकारक है। शुद्धता और साफ-सफाई का ध्यान रखना आवश्यक है। यदि आप बिना स्नान किए पूजा करते हैं, तो धार्मिक मान्यता के अनुसार उसका फल नहीं मिलता। इस पवित्र दिन पर किसी से झगड़ा न करें और नकारात्मक सोच से दूर रहें।


यमुना जी और भगवान कृष्ण का संबंध

श्रीमद्भागवत में यमुना जी को सूर्य देव की पुत्री और यमराज की बहन बताया गया है। भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का केंद्र यमुना का किनारा रहा है। कई कथाओं में यमुना जी को भगवान कृष्ण की पत्नी भी माना गया है, जिससे ब्रजवासियों के लिए इस दिन का महत्व और बढ़ जाता है।


यमुना स्नान का पुण्य

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यमुना छठ पर यमुना नदी में स्नान करने से सभी अनजाने पाप धुल जाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है।


यमुना छठ का धार्मिक महत्व

यमुना छठ, जिसे यमुना जन्मोत्सव भी कहा जाता है, हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण पर्व है। देवी यमुना को भगवान सूर्य की पुत्री और यमराज की बहन माना जाता है। इस दिन यमुना में स्नान करने से सभी पाप धुल जाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है।


यमुना छठ पूजा के नियम

पंडितों के अनुसार, छठ पूजा के दौरान साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए। सात्विक भोजन का सेवन करना चाहिए और प्रसाद केवल व्रति द्वारा तैयार किया जाना चाहिए। छठ पर्व के भोजन में लहसुन और प्याज का उपयोग वर्जित है।


यमुना छठ की पौराणिक कथा

पुराणों के अनुसार, यमुना नदी का जन्म यमराज की बहन और सूर्य देव की पुत्री के रूप में हुआ। यमुना के आँसुओं से नदी का प्रवाह तेज हो गया और वह यमुना नदी के नाम से जानी गई। यमुना को सूर्यतनया, सूर्यजा और रविनंदिनी भी कहा जाता है।


यमुना छठ का शुभ मुहूर्त

पंचांग के अनुसार, चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि 23 मार्च 2026 को शाम 6:38 बजे शुरू होगी और 24 मार्च 2026 को शाम 4:07 बजे समाप्त होगी। इस दिन यमुना जयंती धूमधाम से मनाई जाएगी।


यमुना छठ की पूजा विधि

पंडितों के अनुसार, घाटों की सफाई, आतिशबाजी और 'नैवेद्यम' का भोग लगाया जाता है। पूजा के बाद ब्राह्मण भोज और प्रसाद वितरण की परंपरा है। भक्त भोर से पहले उठकर यमुना नदी में आध्यात्मिक स्नान करते हैं। इस दिन यमुना नदी में स्नान करने से भक्त अपनी आत्मा को शुद्ध कर सकते हैं।