रक्षाबंधन के बाद राखी उतारने का सही समय और धार्मिक महत्व
रक्षाबंधन का त्योहार और राखी का महत्व
नई दिल्ली: रक्षाबंधन का पर्व समाप्त होने के बाद भी भाई की कलाई पर बंधी राखी कई दिनों तक दिखाई देती है। इसके बाद अक्सर यह सवाल उठता है कि इसे कब उतारना शुभ माना जाता है और उतारी गई राखी का क्या किया जाए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, राखी केवल एक धागा नहीं, बल्कि यह रक्षा सूत्र का प्रतीक है। इसलिए इसे उतारने और रखने के संबंध में कुछ परंपराएं प्रचलित हैं।
रक्षाबंधन की तिथि
द्रिक पंचांग के अनुसार, 2026 में श्रावण पूर्णिमा 27 अगस्त को सुबह 9:09 बजे से शुरू होगी और इसका समापन 28 अगस्त को सुबह 9:48 बजे होगा। उदया तिथि के अनुसार, रक्षाबंधन का पर्व 28 अगस्त 2026, शुक्रवार को मनाया जाएगा। इस दिन बहनें भाई की कलाई पर राखी बांधकर उसकी लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। भाई भी बहन की सुरक्षा का वचन देते हैं।
राखी उतारने का सही समय
राखी उतारने के लिए शास्त्रों में एक निश्चित दिन नहीं बताया गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, राखी को कम से कम 24 घंटे तक कलाई पर रखना शुभ माना जाता है। हालांकि, विभिन्न परिवारों और क्षेत्रों में इस परंपरा में भिन्नता देखने को मिलती है। कुछ लोग राखी को 3 से 7 दिन तक बांधे रखते हैं, जबकि कुछ परिवारों में इसे जन्माष्टमी के दिन उतारने की परंपरा है। इसलिए अपने परिवार की परंपरा का पालन करना उचित है।
जन्माष्टमी पर राखी उतारना
रक्षाबंधन के बाद श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का त्योहार आता है। कुछ धार्मिक परंपराओं में इस दिन पूजा के बाद राखी उतारने की मान्यता है। इसे भगवान श्रीकृष्ण के प्रति श्रद्धा और रक्षा सूत्र को सम्मानपूर्वक हटाने की भावना से जोड़ा जाता है। हालांकि, यह हर व्यक्ति के लिए अनिवार्य नहीं है। जिन परिवारों में यह परंपरा है, वे पूजा के बाद राखी खोल सकते हैं।
पुरानी राखी का सम्मान
राखी को उतारकर कहीं भी फेंकना उचित नहीं माना जाता। इसे सम्मानपूर्वक खोलने की परंपरा है। राखी उतारने से पहले स्नान करके भगवान का स्मरण करें और फिर शांत मन से इसे कलाई से निकालें। उतारी गई राखी को कूड़ेदान में डालने से बचना चाहिए। इसे साफ कपड़े में लपेटकर पूजा स्थान या किसी स्वच्छ जगह पर रखा जा सकता है। यदि राखी प्राकृतिक सामग्री से बनी है, तो इसे साफ बहते जल में विसर्जित करना भी उचित है।
राखी का धार्मिक महत्व
राखी भाई-बहन के प्रेम, विश्वास और एक-दूसरे की रक्षा के संकल्प का प्रतीक है। बहन भाई के सुखी और स्वस्थ जीवन की प्रार्थना करती है, जबकि भाई हर परिस्थिति में बहन का साथ देने का वादा करता है। यही कारण है कि राखी को उतारते समय भी सम्मान और श्रद्धा रखने की परंपरा मानी जाती है।