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राधा अष्टमी: 31 अगस्त को मनाने की तैयारी, जानें पूजा विधि

राधा अष्टमी का पर्व 31 अगस्त को मनाया जाएगा। इस दिन राधा रानी की विधिपूर्वक पूजा की जाती है और विशेष दान का महत्व होता है। जानें इस पर्व की पूजा विधि, दान का महत्व और राधा रानी को प्रसन्न करने के उपाय। इस साल, अष्टमी तिथि 30 अगस्त को रात 10:46 बजे से शुरू होगी और 31 अगस्त को समाप्त होगी। पूजा का शुभ समय सुबह 11:05 से 01:38 बजे तक रहेगा।
 

राधा अष्टमी का महत्व


राधा अष्टमी का पर्व हर साल भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन राधा रानी की पूजा विधिपूर्वक की जाती है और विशेष दान का महत्व होता है। इस वर्ष, भाद्रपद माह की अष्टमी तिथि 30 अगस्त को रात 10:46 बजे से शुरू होगी।


अष्टमी तिथि का समापन 31 अगस्त को रात 12:57 बजे होगा, इसलिए राधा अष्टमी का पर्व 31 अगस्त को मनाया जाएगा। पूजा का शुभ समय सुबह 11:05 से 01:38 बजे तक रहेगा।


राधा अष्टमी पूजा विधि

यदि आप अपने वैवाहिक जीवन में खुशियों की कामना करते हैं, तो राधा अष्टमी के दिन सुबह स्नान के बाद सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करें।


मंदिर की सफाई के बाद पूजा की शुरुआत करें और देसी घी का दीपक जलाकर आरती करें।


श्री राधा रानी और भगवान कृष्ण को फूल, बांसुरी और भोग अर्पित करें। वैवाहिक सुख-शांति की प्राप्ति के लिए प्रार्थना करें।


धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस विधि से साधक पर राधा रानी की कृपा बनी रहती है और वैवाहिक जीवन में खुशियाँ आती हैं।


दान का महत्व

राधा अष्टमी के दिन पूजा के बाद मंदिर या जरूरतमंदों को अन्न और धन का दान करें।


ऐसी मान्यता है कि इस दान से साधक को जीवन में कभी भी कमी का सामना नहीं करना पड़ता और धन की कमी नहीं होती।


राधा रानी को प्रसन्न करने के उपाय

राधा अष्टमी की पूजा में सच्चे मन से राधा रानी के 108 नामों का जाप करें। सुख-समृद्धि की कामना करें।


इस उपाय से साधक को राधा रानी का आशीर्वाद प्राप्त होता है और जीवन में सुख-शांति बनी रहती है।