ललिता सप्तमी 2025: राधा रानी की प्रिय सखी का महत्व
ललिता सप्तमी का पर्व
Lalita Saptami 2025: भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को ललिता सप्तमी के रूप में मनाया जाता है। देवी ललिता राधा रानी की प्रिय सखी थीं, और माना जाता है कि इसी दिन उनका प्राकट्य हुआ था। ललिता सप्तमी के अगले दिन राधारानी का जन्म होता है, इसलिए इसे राधा अष्टमी के पर्व के रूप में मनाया जाता है।
ललिता की पूजा का महत्व
मान्यता है कि देवी ललिता की पूजा करने से राधा रानी और भगवान श्रीकृष्ण प्रसन्न होते हैं, और भक्तों की सभी इच्छाएं पूरी होती हैं। कई स्थानों पर यह भी माना जाता है कि ललिता सखी राधा रानी की परम भक्त गोपी हैं और श्रीकृष्ण की आठ पटरानियों में से एक हैं। राधा-कृष्ण के प्रति उनकी भक्ति इतनी गहरी थी कि उन्होंने अपना जीवन भक्ति में समर्पित कर दिया।
राधा रानी की सखियों में ललिता का स्थान
ललिता सखी राधा रानी की आठ प्रमुख सखियों में से एक थीं। वह राधा-कृष्ण की सभी लीलाओं में उनके साथ रहती थीं और गोलोक में निवास करती थीं। उनका जन्मस्थान ब्रज के पास ऊंचागांव है। राधा रानी की अन्य सखियों में विशाखा, चित्रा, इंदुलेखा, चंपकलता, रंगदेवी, तुंगविद्या और सुदेवी शामिल हैं। ललिता को राधा की सबसे विश्वासपात्र सहेली माना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, ललिता का जन्म बरसाना के पास करेहला गांव में हुआ था।
ललिता का श्रीकृष्ण से संबंध
ललिता सखी का श्रीकृष्ण और राधा रानी के साथ गहरा संबंध था। वह न केवल राधा की प्रिय सखी थीं, बल्कि श्रीकृष्ण के प्रति भी गहरी भक्ति रखती थीं। शास्त्रों के अनुसार, ललिता राधा और कृष्ण की निकुंज लीलाओं की साक्षी थीं और उनकी सेवा में तत्पर रहती थीं। वह राधा-कृष्ण की प्रेम लीलाओं को संचालित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती थीं।
ललिता की भक्ति
ललिता का राधा के प्रति प्रेम इतना गहरा था कि वह हमेशा राधा का पक्ष लेती थीं। श्रीकृष्ण भी ललिता की भक्ति और राधा के प्रति उनकी निष्ठा का सम्मान करते थे। शास्त्रों में उल्लेख है कि श्रीकृष्ण राधा के बाद यदि किसी की बात सबसे अधिक मानते थे, तो वह ललिता ही थीं। सूरदास जैसे भक्ति कवियों ने ललिता को राधा की प्रिय सखी के रूप में चित्रित किया है।