शारदीय नवरात्रि: दुर्गा सप्तशती और देवी के नौ स्वरूपों का महत्व
शारदीय नवरात्रि का आगाज़
नई दिल्ली: इस वर्ष शारदीय नवरात्रि का आरंभ 11 अक्टूबर, रविवार से होगा। इस दौरान मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा विधिपूर्वक की जाएगी। नौ दिनों तक घरों और मंदिरों में देवी की आराधना के साथ-साथ दुर्गा सप्तशती का पाठ भी किया जाएगा।
दुर्गा सप्तशती का महत्व
दुर्गा सप्तशती, जिसे 'देवी माहात्म्य' या 'चंडी पाठ' भी कहा जाता है, मार्कंडेय पुराण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसे महर्षि वेद व्यास ने लिखा है और इसमें 13 अध्याय तथा 700 श्लोक शामिल हैं। इस ग्रंथ में देवी दुर्गा की सम्पूर्ण कथा, रहस्य, कवच, अर्गला, कीलक और उनके विभिन्न रूपों का वर्णन किया गया है।
महासक्ति के विभिन्न रूप
दुर्गा सप्तशती में यह बताया गया है कि कैसे देवी ने विभिन्न रूपों में प्रकट होकर महिषासुर, शुंभ-निशुंभ, चंड-मुंड और रक्तबीज जैसे दुष्टों का वध किया। पहले अध्याय में दैत्य मधु कैटभ का वध, दूसरे में देवी का अवतरण और महिषासुर की सेना का नाश, और तीसरे में महिषासुर और उसके सेनापति का वध वर्णित है।
सप्तशती के अध्यायों का विवरण
चौथे अध्याय में देवताओं द्वारा मां की स्तुति की गई है, जबकि पांचवे में चंड मुंड द्वारा देवी की सुंदरता का वर्णन है। छठे अध्याय में धुम्रलोचन का वध, सातवें में चंड मुंड का वध, और आठवें में रक्तबीज का वध किया गया है।
नवदुर्गा की उपासना
देवी के ये रूप और उनके युद्ध के प्रसंग नवदुर्गा की उपासना की परंपरा का आधार बने। दुर्गा सप्तशती में 700 श्लोकों को तीन भागों में बांटा गया है: महाकाली, महालक्ष्मी, और महासरस्वती। ये तीनों महाशक्ति के मूल स्वरूप हैं, जिनसे नवदुर्गा की आराधना का विधान पुष्ट होता है।
दुर्गा सप्तशती का पाठ
मान्यता है कि दुर्गा सप्तशती का पाठ करने से भय, शोक और सभी प्रकार के कष्टों से मुक्ति मिलती है। विशेष रूप से नवरात्रों में इसका पाठ किया जाता है और यह अचूक फल देने वाला माना जाता है।
श्लोकों का महत्व
दुर्गा सप्तशती के विभिन्न श्लोकों का विशेष महत्व है। इनका पाठ करने से भक्तों को अनेक लाभ होते हैं।
“सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके। शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणी नमोस्तुते॥” यह मंत्र शुभ कार्यों की शुरुआत, पारिवारिक सुख, और सभी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है।
“ऊं जयन्ती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोस्तुते॥” इस मंत्र का जाप जीवन में विजय पाने और संकटों को टालने के लिए किया जाता है।
“शूलेन पाहि नो देवि पाहि खड्गेन चाम्बिके। घण्टास्वनेन नः पाहि चापज्यानिःस्वनेन च॥” यह मंत्र आध्यात्मिक सुरक्षा कवच बनाता है।
“सर्वाबाधाप्रशमनं त्रैलोक्यस्याखिलेश्वरि। एवमेव त्वया कार्यमस्मद्वैरिविनाशनम्॥” इस मंत्र से मां से गुप्त या प्रत्यक्ष शत्रुओं के विनाश की प्रार्थना की जाती है।
“सर्वाबाधा विनिर्मुक्तो धनधान्यसुतान्वितः। मनुष्यो मत्प्रसादेन भविष्यति नसंशयः॥” इस मंत्र के जाप से मां दुर्गा की कृपा से घर में धन-धान्य और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।