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श्रीकृष्ण जन्माष्टमी: व्रत खोलने की विधि और महत्व

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व भक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है। इस दिन उपवास रखने के बाद रात 12 बजे भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का उत्सव मनाया जाता है। जानें व्रत खोलने की विधि और इसके पीछे की धार्मिक मान्यता। इस लेख में हम आपको बताएंगे कि कैसे व्रत का पारण किया जाता है और प्रसाद ग्रहण करने की सही विधि क्या है।
 

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व

आज देशभर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है। इस दिन भक्तजन श्रद्धा के साथ भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करते हैं और उपवास रखते हैं। दिनभर उपवास रखने के बाद रात में भगवान कृष्ण के जन्म के समय विशेष पूजा-अर्चना की जाती है और उन्हें भोग अर्पित किया जाता है। 


व्रत का पारण

जन्माष्टमी के उपवास का पारण विशेष महत्व रखता है। यह अन्य व्रतों के पारण से भिन्न होता है, क्योंकि इसमें उपवास उसी दिन खोला जाता है। पारण के समय अन्न का सेवन करना अनिवार्य होता है। आइए जानते हैं जन्माष्टमी के पारण की विधि और व्रत खोलते समय क्या खाना चाहिए। 


रात 12 बजे के बाद पारण

रात 12 बजे के बाद किया जाता है पारण
धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मध्यरात्रि में हुआ था। इसलिए जन्माष्टमी की रात लगभग 12 बजे भगवान के जन्म का उत्सव मनाया जाता है। इस अवसर पर लड्डू गोपाल का अभिषेक, पूजन, आरती और भोग अर्पित किया जाता है।
कई भक्त भगवान के जन्म और पूजा के बाद उसी समय प्रसाद ग्रहण कर व्रत खोलते हैं। इसका अर्थ है कि रात 12 बजे के बाद व्रत का पारण किया जा सकता है। कुछ लोग अगले दिन सूर्योदय के बाद व्रत का पारण करते हैं। 


प्रसाद ग्रहण करने की विधि

सबसे पहले लें भगवान का प्रसाद 
जब आप व्रत खोलें, तो सबसे पहले भगवान श्रीकृष्ण को अर्पित किया गया प्रसाद ग्रहण करना चाहिए। पारण की शुरुआत चरणामृत, माखन-मिश्री, धनिया पंजीरी या ताजे फलों से करनी चाहिए। पहले चरणामृत लें, फिर थोड़ा प्रसाद लेकर अपना व्रत खोलें।


जन्माष्टमी पर व्रत खोलने का महत्व

जन्माष्टमी पर रात में ही क्यों खोला जाता है व्रत?
धार्मिक मान्यता के अनुसार, जन्माष्टमी पर मध्यरात्रि का विशेष महत्व है, क्योंकि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म इसी समय हुआ था। इसलिए रात 12 बजे भगवान का जन्मोत्सव मनाया जाता है।