×

सावन शिवरात्रि: पूजा विधि और महत्व

सावन शिवरात्रि का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। इस दिन भगवान शिव की पूजा और आराधना से जीवन की कठिनाइयाँ दूर होती हैं। जानें इस साल की तिथि, मुहूर्त और पूजा विधि के बारे में। भद्राकाल का प्रभाव भी इस बार रहेगा, लेकिन शिवभक्त बिना डर के पूजा कर सकते हैं। जानें कैसे करें पूजा और क्या है इस दिन का महत्व।
 

सावन शिवरात्रि का महत्व

हिंदू धर्म में सावन शिवरात्रि का एक विशेष स्थान है। सावन का महीना भगवान शिव के लिए अत्यंत प्रिय माना जाता है। इस दौरान भगवान शिव की पूजा और अर्चना का विशेष महत्व होता है। शिव की पूजा, जप, जलाभिषेक और रुद्राभिषेक करने से जीवन की सभी कठिनाइयाँ दूर होती हैं और बाधाएँ समाप्त होती हैं। सावन माह की शिवरात्रि का विशेष महत्व है, और इस दिन भगवान शिव की आराधना को शुभ और फलदायी माना जाता है। आइए, जानते हैं सावन शिवरात्रि की तिथि, मुहूर्त और पूजा विधि के बारे में...


तिथि और मुहूर्त

हर वर्ष सावन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को सावन शिवरात्रि मनाई जाती है। इस साल, चतुर्दशी तिथि 11 अगस्त 2026 को सुबह 04:53 मिनट से शुरू होगी और इसका समापन 12 अगस्त को रात 01:51 मिनट पर होगा। उदयातिथि के अनुसार, 11 अगस्त को सावन शिवरात्रि का आयोजन किया जाएगा। इस दिन रात्रि के चारों प्रहर में शिव और पार्वती की पूजा का विशेष महत्व है।


भद्रा का साया

इस बार सावन शिवरात्रि पर भद्राकाल का प्रभाव रहेगा। धार्मिक ग्रंथों में भद्राकाल को शुभ नहीं माना जाता है। भद्रा सुबह से लग जाएगी और दोपहर 03:22 मिनट तक रहेगी। हालांकि, भगवान शिव की पूजा और जलाभिषेक में भद्रा दोष मान्य नहीं होता। इसलिए शिवभक्त बिना किसी भय के भद्राकाल में भगवान शिव की पूजा कर सकते हैं।


पूजन विधि

इस दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। फिर घर के मंदिर की सफाई करें और निकटवर्ती शिवालय में जाकर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करें। शिवलिंग पर जल, गंगाजल, दही, दूध, घी, शहद और शक्कर से अभिषेक करें। इसके बाद शिवलिंग का पुनः जल से अभिषेक करें। फिर धतूरा, बेलपत्र, भांग, फूल और सफेद चंदन अर्पित करें।


भगवान शिव को फल और मिठाई अर्पित करें और नैवेद्य अर्पित करें। इसके बाद 'ऊँ नम: शिवाय' मंत्र, महामृत्युंजय मंत्र और शिव चालीसा का पाठ करें। अंत में भगवान शिव की आरती करें और पूजा में हुई भूलों के लिए क्षमा मांगें।