सुप्रीम कोर्ट की सख्त चेतावनी: त्योहारों पर मनमाने किराए वसूलने वाली एयरलाइंस पर कार्रवाई
सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख
नई दिल्ली: त्यौहारों और छुट्टियों के दौरान हवाई यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए एक महत्वपूर्ण खबर आई है। आमतौर पर त्योहारों के समय एयरलाइंस द्वारा टिकटों की कीमतें बढ़ा दी जाती हैं, लेकिन अब इस 'हवाई लूट' पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। सर्वोच्च अदालत ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि विमानन कंपनियां निर्धारित नियमों का पालन नहीं करती हैं, तो उनकी उड़ानें रद्द की जा सकती हैं। इस टिप्पणी के बाद, मनमाने किराए वसूलने वाली एयरलाइंस में हड़कंप मचने की संभावना है।
नियमों के पालन पर गंभीर सवाल
नियमों के पालन पर अदालत ने उठाए गंभीर सवाल
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने इस मामले की सुनवाई के दौरान मौजूदा व्यवस्था की खामियों पर चिंता व्यक्त की। पीठ ने कहा कि यात्रियों की सुविधा और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए नियम तो बनाए गए हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर उनके पालन की स्थिति स्पष्ट नहीं है। अदालत का मानना है कि नियमों का प्रभावी कार्यान्वयन न होना सीधे तौर पर यात्रियों के अधिकारों का उल्लंघन है।
सरकार ने पेश किया नियमों का मसौदा
सीलबंद लिफाफे में सरकार ने सौंपा नियमों का मसौदा
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान, केंद्र सरकार के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अनिल कौशिक ने अदालत को नए नियमों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि हवाई किराए और शुल्कों को नियंत्रित करने के लिए नए नियमों का मसौदा अंतिम चरण में है। इसके साथ ही, सरकार ने अदालत को एक सीलबंद लिफाफे में इन नियमों का ड्राफ्ट भी सौंपा है। केंद्र ने इन नियमों को अंतिम रूप देने के लिए अदालत से तीन हफ्ते का समय मांगा है।
याचिकाकर्ता की दलील
मनमाने किराए और अतिरिक्त शुल्क पर याचिकाकर्ता की दलील
यह मामला सामाजिक कार्यकर्ता एस. लक्ष्मी नारायणन द्वारा दायर जनहित याचिका से संबंधित है। याचिका में निजी एयरलाइंस पर यात्रियों से मनमाना किराया और छिपे हुए अतिरिक्त शुल्क वसूलने का आरोप लगाया गया है। याचिकाकर्ता ने अदालत में यह भी कहा कि नागरिक उड्डयन मंत्री का संसद में यह कहना दुर्भाग्यपूर्ण है कि सरकार हवाई किराए पर कोई ऊपरी सीमा नहीं तय कर सकती। याचिका में हवाई किराए के सिस्टम को पारदर्शी बनाने और एक मजबूत नियामक ढांचे की मांग की गई है।
सुप्रीम कोर्ट की पूर्व की नाराजगी
पहले भी यात्रियों के शोषण पर भड़क चुका है सुप्रीम कोर्ट
यह पहली बार नहीं है जब सर्वोच्च न्यायालय ने हवाई किराए की मनमानी पर नाराजगी जताई है। पहले भी अदालत ने कहा था कि त्योहारों के समय अचानक टिकट के दाम बढ़ाना यात्रियों का शोषण है। पिछले मई में हुई सुनवाई में एक उदाहरण पेश किया गया था, जिसमें एक ही रूट पर विभिन्न एयरलाइंस का किराया 8 हजार से 18 हजार रुपये तक था। इस पर कोर्ट ने कड़ी आपत्ति जताई थी।
आगे की सुनवाई
अब 7 सितंबर को तय होगा आगे का एक्शन प्लान
केंद्र सरकार द्वारा नए नियमों को अंतिम रूप देने के लिए मांगे गए तीन हफ्ते का समय सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है। अगली सुनवाई 7 सितंबर को होगी, जब केंद्र सरकार अदालत के सामने अपने नए नियमों का अंतिम खाका पेश करेगी। उस दिन यह स्पष्ट होगा कि हवाई किराए की मनमानी पर रोक लगाने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे।