सोम प्रदोष व्रत: पौराणिक कथा और इसके महत्व
सोम प्रदोष व्रत, जो भगवान शिव को समर्पित है, 16 मार्च को मनाया जा रहा है। यह दिन विशेष रूप से भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा प्राप्त करने का अवसर है। इस लेख में, हम सोम प्रदोष व्रत की पौराणिक कथा और इसके महत्व के बारे में जानेंगे। कथा सुनने से भक्तों के दुख दूर होते हैं और भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त होता है। जानें इस व्रत के पीछे की कहानी और इसके लाभ।
Mar 16, 2026, 11:42 IST
सोम प्रदोष व्रत का महत्व
आज, 16 मार्च को सोम प्रदोष व्रत मनाया जा रहा है। यह व्रत सोमवार के दिन पड़ने वाले प्रदोष तिथि को समर्पित है, जिसे सोम प्रदोष कहा जाता है। यह विशेष दिन भगवान शिव को समर्पित है, और सोमवार भगवान शंकर का दिन माना जाता है। प्रदोष तिथि भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा प्राप्त करने का सबसे शुभ समय है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, जब ये दोनों संयोग एक साथ आते हैं, तब इसे सोम प्रदोष कहा जाता है। धार्मिक ग्रंथों में कहा गया है कि प्रदोष व्रत की कथा सुने या पढ़े बिना पूजा अधूरी मानी जाती है। यदि आप अपनी पूजा को पूर्ण करना चाहते हैं, तो इस दिन प्रदोष काल में सच्ची श्रद्धा से कथा अवश्य सुनें या पढ़ें।
सोम प्रदोष व्रत की पौराणिक कथा
सोम प्रदोष व्रत की पौराणिक कथा
किसी समय की बात है, एक गरीब ब्राह्मणी अपने बच्चों के साथ भीख मांगकर जीवन यापन कर रही थी। एक दिन उसे नदी के किनारे एक घायल बालक मिला, जो विदर्भ का राजकुमार था। उसके माता-पिता को शत्रुओं ने मारकर उसका राज्य छीन लिया था। ब्राह्मणी ने उस राजकुमार को अपने घर ले जाकर अपने बेटे की तरह पालना शुरू किया। कुछ समय बाद, दोनों बच्चे वन में खेलते हुए शांडिल्य ऋषि से मिले। ऋषि ने उन्हें सोम प्रदोष व्रत रखने और उसकी कथा सुनने की विधि बताई। ऋषि की आज्ञा का पालन करते हुए, ब्राह्मणी और बच्चों ने पूरी निष्ठा से सोम प्रदोष का व्रत रखा और कथा सुनना आरंभ किया। कुछ समय बाद, राजकुमार की मुलाकात गंधर्व कन्या अंशुमती से हुई, और दोनों के बीच प्रेम हो गया।
राजकुमार का राज्य पुनः प्राप्त करना
जब गंधर्व राज को पता चला कि यह विदर्भ का असली राजकुमार है, तो उन्होंने अपनी पुत्री का विवाह उससे कर दिया। विवाह के बाद, राजकुमार ने गंधर्व सेना की सहायता से अपना खोया हुआ राज्य वापस प्राप्त किया। राजकुमार ने उस ब्राह्मणी और उसके बेटे को राजमहल में सम्मानपूर्वक स्थान दिया। सोम प्रदोष व्रत और कथा के प्रभाव से राजकुमार को उसका राज्य मिला और ब्राह्मणी की गरीबी हमेशा के लिए समाप्त हो गई।
कथा पाठ के लाभ
कथा पाठ के लाभ
जैसे भगवान शिव ने उस ब्राह्मणी और राजकुमार के सभी कष्ट दूर किए, वैसे ही सोम प्रदोष व्रत की कथा सुनने से भक्तों के सभी दुखों और दरिद्रता का नाश होता है। इसके साथ ही भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त होता है।