हरतालिका तीज: जानें इस पर्व से जुड़ी महत्वपूर्ण मान्यताएँ और सावधानियाँ
हरतालिका तीज का महत्व
नई दिल्ली: हरतालिका तीज का व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस वर्ष, यह पर्व 14 सितंबर को मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, सुखद वैवाहिक जीवन और परिवार की समृद्धि के लिए निर्जला व्रत करती हैं। पूजा के दौरान भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना की जाती है। कहा जाता है कि इस व्रत को श्रद्धा और नियमों के साथ करने से सौभाग्य की प्राप्ति होती है। साथ ही, कुछ ऐसी बातें भी हैं जिन्हें तीज के दिन करने से बचना चाहिए। आइए जानते हैं ऐसी ही पांच मान्यताओं के बारे में।
काले रंग से करें परहेज
हरतालिका तीज की पूजा के समय काले रंग के कपड़े या चूड़ियों का उपयोग नहीं करने की सलाह दी जाती है। इस पर्व पर लाल, हरा और पीला रंग शुभ माना जाता है, इसलिए महिलाएं इन रंगों के परिधान और श्रृंगार का चयन कर सकती हैं।
क्रोध और विवाद से बचें
व्रत के दिन मन को शांत रखना आवश्यक है। इस दौरान पति, परिवार या किसी अन्य व्यक्ति के साथ बेवजह बहस और गुस्सा करने से बचना चाहिए। मान्यता है कि तीज के दिन सकारात्मक वातावरण बनाए रखना शुभ होता है।
दिन में न सोने की मान्यता
हरतालिका तीज का व्रत कई स्थानों पर कठिन उपवास के रूप में मनाया जाता है। धार्मिक परंपरा के अनुसार, इस दौरान दिन-रात जागकर भगवान का स्मरण, भजन और पूजा करने की मान्यता है।
व्रत को लेकर रखें निरंतरता
हरतालिका तीज का संकल्प लेने के बाद इसे श्रद्धा के साथ नियमित रूप से करना चाहिए। हालांकि, स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के मामले में व्रत रखने से पहले अपनी स्थिति का ध्यान रखना आवश्यक है।
शिव-पार्वती के साथ गणेश जी की पूजा
तीज की पूजा में भगवान शिव और माता पार्वती के साथ गणेश जी की आराधना भी महत्वपूर्ण मानी जाती है। धार्मिक परंपरा में गणेश जी को प्रथम पूज्य माना गया है, इसलिए पूजा-विधि में उनका स्मरण करना शुभ होता है।