हरतालिका तीज व्रत: महत्व, तिथि और पारण विधि
हरतालिका तीज का महत्व
हरतालिका तीज का व्रत हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण पर्व है। इस दिन विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य के लिए व्रत करती हैं। यह व्रत निर्जला होता है, जिसमें भगवान शिव और माता पार्वती की विशेष पूजा की जाती है।
हरतालिका तीज व्रत का फल
धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस व्रत को सच्चे मन से करने पर महिलाओं को अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मिलता है। व्रत का फल तभी पूर्ण होता है जब इसे विधिपूर्वक पारण किया जाए। इस लेख में हम आपको बताएंगे कि हरतालिका तीज का पारण कब और कैसे करना चाहिए।
हरतालिका तीज 2026 की तिथि और समय
हिंदू पंचांग के अनुसार, भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 13 सितंबर को सुबह 07:08 बजे शुरू होगी और 14 सितंबर को सुबह 07:06 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि के अनुसार, हरतालिका तीज का व्रत 14 सितंबर को मनाया जाएगा।
हरतालिका तीज व्रत पारण का समय
इस वर्ष हरतालिका तीज व्रत का पारण 15 सितंबर को सुबह किया जाएगा। पारण के समय स्नान कर पूजा-अर्चना करना आवश्यक है। इस दिन दान का भी विशेष महत्व है, क्योंकि दान करने से व्रत का फल पूर्ण होता है और सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है।
हरतालिका तीज व्रत पारण विधि
- चतुर्थी तिथि के दिन सुबह स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र पहनें।
- मंदिर में गंगाजल का छिड़काव कर उसे शुद्ध करें।
- भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करें।
- मंत्रों का जप करें।
- वैवाहिक जीवन में सुख-शांति की कामना करें।
- सात्विक भोग लगाएं।
- पूजा के बाद शिव-पार्वती की मूर्तियों को पवित्र नदी में विसर्जित करें या किसी पेड़ के पास रखें।
- व्रत का पारण करने से पहले किसी विवाहित महिला को सुहाग की सामग्री जैसे चूड़ी, बिंदी, सिंदूर आदि का दान करें।
- अंत में सात्विक भोजन या फल का सेवन कर व्रत का पारण करें।