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हरियाली अमावस्या पर पितरों की तृप्ति के लिए पौधे लगाने की विधि

हरियाली अमावस्या का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। इस दिन पितरों की तृप्ति के लिए कुछ खास पौधे लगाने की परंपरा है। जानें कि कौन-से पौधे लगाने से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है और जीवन में सुख-समृद्धि कैसे बढ़ाई जा सकती है। इस लेख में हम आपको बताएंगे कि पीपल, बरगद और बेलपत्र के पौधे लगाने का क्या महत्व है।
 

हरियाली अमावस्या का महत्व

हिंदू धर्म में अमावस्या की तिथि का विशेष महत्व है, विशेषकर सावन में आने वाली हरियाली अमावस्या। इस दिन पितरों और भगवान शिव की कृपा प्राप्त करना अत्यंत शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस अवसर पर पितरों का तर्पण करने से पितृ दोष से मुक्ति मिल सकती है और पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस वर्ष हरियाली अमावस्या 12 अगस्त को मनाई जाएगी।


पौधे लगाने की विशेष विधि

धार्मिक ग्रंथों और गरुड़ पुराण के अनुसार, हरियाली अमावस्या के दिन कुछ विशेष पौधे लगाने से पितर प्रसन्न होते हैं, जिससे परिवार को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है। आइए जानते हैं कि इस दिन पितरों की तृप्ति के लिए कौन-से पौधे लगाने चाहिए।


अमावस्या पर पितरों की शांति के लिए पौधे

पीपल का पेड़


पीपल के पेड़ की जड़ को ब्रह्मा जी, तने को भगवान विष्णु और ऊपरी हिस्से को महादेव का वास माना जाता है। इस पेड़ में पितरों का निवास भी माना जाता है। हरियाली अमावस्या पर पीपल का पेड़ लगाने से पितृ दोष की समस्या दूर हो सकती है और जीवन में सुख-शांति बनी रहती है। शनिवार को इसके पास दीपक जलाने से शनि की साढ़े साती और ढैय्या से मुक्ति मिलती है।


बरगद का पेड़


हरियाली अमावस्या के दिन बरगद का पेड़ लगाने से पितर प्रसन्न होते हैं और परिवार को आशीर्वाद देते हैं। हिंदू धर्म में इसे दीर्घायु और वंश वृद्धि का प्रतीक माना जाता है। इस पेड़ की पूजा और परिक्रमा करने से पितरों की कृपा प्राप्त होती है। इसे पूर्व या उत्तर दिशा में लगाना चाहिए।


बेलपत्र का पौधा


सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित है। इस अवसर पर बेलपत्र का पौधा लगाना विशेष महत्व रखता है। हरियाली अमावस्या के दिन बेलपत्र का पौधा लगाने से महादेव की कृपा प्राप्त होती है और पितरों को जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति मिलती है। इसे उत्तर-पूर्व या पूर्व दिशा में लगाना चाहिए।