Apple का पहला फोल्डेबल स्मार्टफोन iPhone Duo भारत में लॉन्च
iPhone Duo की भारत में कीमत और विशेषताएँ
नई दिल्ली: Apple ने अपने पहले फोल्डेबल स्मार्टफोन, iPhone Duo, को भारत में पेश किया है। यह नया डिवाइस फोल्डेबल iPhone की श्रेणी में एक महत्वपूर्ण कदम है। भारत में iPhone Duo की शुरुआती कीमत 2,99,900 रुपये है, जो इसके 256 जीबी स्टोरेज वेरिएंट के लिए है। वहीं, 2TB स्टोरेज वाला टॉप मॉडल 4,49,900 रुपये में उपलब्ध होगा।
अमेरिका में इसकी शुरुआती कीमत 1,999 डॉलर है, जो भारतीय मुद्रा में लगभग 1.90 लाख रुपये के बराबर है। इस प्रकार, भारत में इसकी कीमत अमेरिका की तुलना में काफी अधिक प्रतीत होती है। आइए जानते हैं कि भारत में iPhone Duo की कीमत अधिक क्यों है।
टैक्स और इम्पोर्ट ड्यूटी का प्रभाव
भारत में iPhone Duo की कीमत 2,99,900 रुपये में 18% GST शामिल है। यदि GST को हटाया जाए, तो इसकी कीमत लगभग 2,54,153 रुपये रह जाती है। इसके अलावा, अनुमानित 28% इंपोर्ट ड्यूटी को हटाने पर कीमत लगभग 1,98,557 रुपये होती है, जो लगभग 2,087 डॉलर के बराबर है। अमेरिका में इसकी शुरुआती कीमत 1,999 डॉलर है। इस प्रकार, टैक्स और इंपोर्ट लागत को हटाने के बाद दोनों देशों की कीमत में केवल 88 डॉलर का अंतर रह जाता है। हालांकि, यह केवल एक अनुमान है और वास्तविक कीमत Apple की सप्लाई चेन, टैक्स और आयात लागत पर निर्भर कर सकती है।
iPhone Duo का आयात और निर्माण
Apple ने पिछले कुछ वर्षों में भारत में iPhone की मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा दिया है। भारत में निर्मित iPhone मॉडल पर आयात लागत कम होने के कारण कीमत को नियंत्रित करना आसान होता है। लेकिन iPhone Duo के मामले में, यह पूरी तरह से आयातित यूनिट के रूप में आ रहा है।
फोल्डेबल फोन का निर्माण सामान्य स्मार्टफोन की तुलना में अधिक जटिल होता है। इसकी स्क्रीन, हिंज और अन्य हिस्सों को बनाने में उच्च सटीकता की आवश्यकता होती है। इस प्रकार, मैन्युफैक्चरिंग और आयात लागत दोनों फोन की कीमत को प्रभावित कर सकते हैं।
क्या iPhone Duo की कीमत भविष्य में घटेगी?
अब सवाल यह है कि क्या भविष्य में iPhone Duo की कीमत भारत में कम हो सकती है। इसका उत्तर मुख्य रूप से स्थानीय मैन्युफैक्चरिंग पर निर्भर करेगा। यदि Apple भारत में फोल्डेबल iPhone का उत्पादन शुरू करता है, तो आयात लागत में कमी आ सकती है। हालांकि, पहली पीढ़ी के फोल्डेबल फोन का बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू करना कंपनी के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है। जैसे-जैसे उत्पादन तकनीक में सुधार होगा और कंपनी को अधिक अनुभव प्राप्त होगा, लागत में कमी की संभावना भी बढ़ सकती है।