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क्या भारत बनेगा Apple का नया गढ़? जानें 500% टैरिफ का असर

भारत अब Apple के लिए एक महत्वपूर्ण उत्पादन केंद्र बन चुका है, जहाँ से iPhone की सप्लाई में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। 2025 में भारत से iPhone का निर्यात 2.03 लाख करोड़ रुपये को पार कर गया है। अमेरिका के राष्ट्रपति द्वारा 500% टैरिफ लगाने की संभावना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या यह टैरिफ अमेरिकी ग्राहकों पर भारी पड़ेगा? जानें इस लेख में भारत की भूमिका और Apple की सप्लाई चेन में बदलाव के बारे में।
 

Apple के लिए भारत का महत्व


भारत अब केवल एक उभरता हुआ बाजार नहीं रह गया है, बल्कि Apple के लिए एक महत्वपूर्ण उत्पादन केंद्र बन चुका है। 2025 में भारत से iPhone की सप्लाई ने एक नया रिकॉर्ड स्थापित किया है। अमेरिका जैसे बड़े बाजार की आवश्यकताएँ अब काफी हद तक भारत पर निर्भर हो गई हैं। इस बीच, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा 500 प्रतिशत टैरिफ लगाने के बयान ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।


भारत का iPhone निर्यात

2025 में भारत से iPhone का निर्यात 2.03 लाख करोड़ रुपये को पार कर गया है, जो लगभग 23 अरब डॉलर के बराबर है। यह पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 85 प्रतिशत अधिक है। इस वृद्धि के पीछे भारत सरकार की PLI (प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव) योजना का बड़ा योगदान है। Apple ने चीन पर निर्भरता कम करते हुए भारत में उत्पादन को तेजी से बढ़ाया है। Foxconn और Tata जैसी कंपनियों के प्लांट में बने iPhone अब सीधे अमेरिका और अन्य देशों में भेजे जा रहे हैं। इस प्रकार, भारत Apple की वैश्विक सप्लाई चेन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है।


अमेरिका की iPhone जरूरतें

आज अमेरिका में बिकने वाले iPhone का एक बड़ा हिस्सा भारत से आता है। अक्टूबर 2025 में भारत ने अमेरिका को लगभग 1.47 अरब डॉलर के स्मार्टफोन निर्यात किए, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग तीन गुना है। अप्रैल से अक्टूबर 2025 के बीच यह आंकड़ा 10.78 अरब डॉलर तक पहुँच गया। लगभग 70 प्रतिशत अमेरिकी स्मार्टफोन आयात किसी न किसी रूप में भारत से जुड़े हुए हैं। ऐसे में अमेरिका के लिए अचानक किसी अन्य देश पर निर्भर होना आसान नहीं है। सप्लाई चेन में बदलाव में समय, पैसा और जोखिम शामिल होते हैं।


500% टैरिफ का प्रभाव

यदि अमेरिका भारत से आने वाले iPhone पर 500 प्रतिशत का टैरिफ लगाता है, तो इसका सीधा असर कीमतों पर पड़ेगा। भारत से सप्लाई इतनी बड़ी मात्रा में हो रही है कि इसे तुरंत किसी अन्य देश से पूरा करना लगभग असंभव है। ऐसी स्थिति में कंपनियाँ बढ़े हुए टैक्स का बोझ ग्राहकों पर डालेंगी। इसका मतलब है कि अमेरिका में iPhone की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं। जो फोन आज सामान्य कीमत पर मिल रहा है, वह कई गुना महंगा हो सकता है। स्पष्ट है कि नुकसान भारत से ज्यादा अमेरिकी उपभोक्ताओं को उठाना पड़ेगा।


भारत की मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग में प्रगति

भारत ने पिछले कुछ वर्षों में मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग में महत्वपूर्ण प्रगति की है। वर्तमान में देश में पांच बड़े iPhone असेंबली प्लांट कार्यरत हैं और लगभग 45 सप्लायर Apple से जुड़े हुए हैं। भारत अब दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन निर्माता बन चुका है। Apple ने भी भारत पर भरोसा दिखाते हुए iPhone 17 के सभी मॉडल यहीं बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, ताकि वैश्विक मांग को पूरा किया जा सके। यही कारण है कि अमेरिका के लिए भारत को नजरअंदाज करना आसान नहीं है।