क्या यूपीआई लेनदेन पर लागू होगा नया शुल्क? जानें क्या है प्रस्तावित बदलाव
नई दिल्ली में यूपीआई नियमों में संभावित बदलाव
नई दिल्ली: भारत में डिजिटल भुगतान के सबसे लोकप्रिय तरीके, यूपीआई (UPI), से संबंधित नियमों में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन की संभावना है। केंद्र सरकार ने एक प्रस्ताव पेश किया है, जिसके अनुसार 2,000 रुपये से अधिक के व्यावसायिक यूपीआई लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू किया जा सकता है। हालांकि, इस प्रस्ताव को लागू करने की कोई निश्चित तिथि अभी तक निर्धारित नहीं की गई है।
टैक्सेशन एंड अदर लॉज का प्रस्ताव
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में टैक्सेशन एंड अदर लॉज (अमेंडमेंट) बिल के माध्यम से इलेक्ट्रॉनिक भुगतान पर एमडीआर लगाने के मौजूदा प्रतिबंध को हटाने का सुझाव दिया है। यदि यह बदलाव लागू होता है, तो बैंक और भुगतान सेवा प्रदाता बड़े व्यावसायिक यूपीआई लेनदेन पर 0.25% से 0.4% तक का एमडीआर वसूल सकेंगे।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह शुल्क केवल बिजनेस-टू-मर्चेंट (P2M) लेनदेन पर लागू होगा, जबकि व्यक्ति से व्यक्ति (P2P) के बीच होने वाले यूपीआई ट्रांसफर पहले की तरह मुफ्त रहेंगे। इससे आम लोगों के दैनिक लेनदेन, जैसे कि परिवार या दोस्तों को पैसे भेजना, प्रभावित नहीं होंगे।
कौन से लेनदेन होंगे इस दायरे से बाहर?
सरकारी अधिकारियों के अनुसार, प्रस्तावित सीमा 2,000 रुपये से अधिक के लेनदेन पर लागू होगी। ये लेनदेन कुल यूपीआई लेनदेन का लगभग 5 प्रतिशत हैं, लेकिन उनकी कुल मूल्य हिस्सेदारी लगभग 65 प्रतिशत है। इसका मतलब यह है कि दूध, सब्जी, किराना, ऑटो या छोटे दैनिक भुगतान जैसे अधिकांश लेनदेन इस दायरे से बाहर रहेंगे।
जुलाई में यूपीआई लेनदेन का आंकड़ा
आंकड़ों के अनुसार, जुलाई में यूपीआई के माध्यम से लगभग 23.7 अरब लेनदेन हुए, जिनकी कुल राशि लगभग 29.9 लाख करोड़ रुपये रही। अधिकारियों का कहना है कि यदि एमडीआर लागू होता है, तब भी लगभग 95 प्रतिशत यूपीआई लेनदेन पर कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लगेगा। इसके अलावा, सभी व्यापारी यह शुल्क ग्राहकों से वसूलना अनिवार्य नहीं है।
यूपीआई अब भारत के डिजिटल भुगतान तंत्र का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है, और हर महीने अरबों लेनदेन इसके माध्यम से किए जाते हैं। ऐसे में सरकार और नियामक संस्थाएं इस प्रणाली को लंबे समय तक टिकाऊ और मजबूत बनाए रखने के लिए नए विकल्पों पर विचार कर रही हैं। अब इस प्रस्ताव पर सरकार का अंतिम निर्णय आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि बड़े व्यावसायिक यूपीआई भुगतान के नियमों में क्या बदलाव होंगे।