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दिल्ली हाई कोर्ट का टेलीग्राम पर अस्थायी प्रतिबंध: RE-NEET परीक्षा के लिए सरकार का निर्णय सही ठहराया

दिल्ली उच्च न्यायालय ने टेलीग्राम पर अस्थायी प्रतिबंध को बरकरार रखा है, जो RE-NEET परीक्षा के संदर्भ में केंद्र सरकार के निर्णय को सही ठहराता है। अदालत ने कहा कि सरकार ने कानून के तहत अपनी शक्तियों का सही तरीके से उपयोग किया है। इस निर्णय के पीछे कई कारण हैं, जिसमें टेलीग्राम का उपयोग अवैध गतिविधियों के लिए किया जाना शामिल है। जानें इस मामले में अदालत ने क्या कहा और टेलीग्राम के फीचर्स पर क्या चर्चा हुई।
 

दिल्ली हाई कोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला


नई दिल्ली: दिल्ली उच्च न्यायालय ने टेलीग्राम से संबंधित एक महत्वपूर्ण मामले में केंद्र सरकार के निर्णय को सही ठहराया है। अदालत ने उस अस्थायी प्रतिबंध को बनाए रखा है, जो RE-NEET परीक्षा के संदर्भ में टेलीग्राम पर लगाया गया था। 21 जून को होने वाली परीक्षा को ध्यान में रखते हुए, सरकार ने इस प्लेटफॉर्म पर पांच दिनों के लिए रोक लगाने का निर्णय लिया था। सुनवाई के दौरान, उच्च न्यायालय ने कहा कि सरकार ने कानून के तहत अपनी शक्तियों का सही तरीके से उपयोग किया है।


पांच दिन का प्रतिबंध जारी रहेगा

उच्च न्यायालय ने टेलीग्राम पर लगाए गए पांच दिन के अस्थायी प्रतिबंध को बरकरार रखा है। अदालत ने कहा कि इस आदेश में पर्याप्त विचार-विमर्श किया गया है और इसे जल्दबाजी में लिया गया निर्णय नहीं माना जा सकता। इसके साथ ही, कोर्ट ने यह भी कहा कि टेलीग्राम जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म को सूचना के दायरे से बाहर रखने का कोई उचित कारण नहीं है, इसलिए सरकार को इस मामले में कार्रवाई करने का अधिकार है।


आईटी एक्ट के तहत सरकार की शक्तियाँ

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (आईटी एक्ट) सरकार को आवश्यक परिस्थितियों में किसी प्लेटफॉर्म या ऐप पर प्रतिबंध लगाने की शक्ति प्रदान करता है। कोर्ट के अनुसार, यदि राष्ट्रीय हित, सार्वजनिक व्यवस्था या परीक्षा जैसी संवेदनशील प्रक्रियाओं की सुरक्षा के लिए ऐसा कदम उठाना आवश्यक हो, तो सरकार इसके लिए कानूनी रूप से सक्षम है।


सरकार का तर्क

सुनवाई के दौरान, केंद्र सरकार ने टेलीग्राम के संबंध में कई गंभीर मुद्दे अदालत के सामने रखे। सरकार का कहना था कि यह प्लेटफॉर्म कई बार अवैध गतिविधियों के लिए उपयोग किया गया है और कुछ मामलों में इसे आतंकवादी नेटवर्क और अन्य आपराधिक गतिविधियों के लिए सहायक माना गया है। परीक्षा से जुड़े मामलों में भी टेलीग्राम का नाम कई बार सामने आया है, इसलिए एहतियात के तौर पर यह कदम उठाना आवश्यक था।


पिछले आरोपों का संदर्भ

टेलीग्राम पर पहले भी कई बार पेपर लीक, फर्जी प्रश्नपत्रों के प्रसार और गलत सूचनाएं फैलाने के आरोप लग चुके हैं। विभिन्न रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया है कि साइबर अपराधी और ऑनलाइन ठगी करने वाले समूह इस प्लेटफॉर्म का बड़े पैमाने पर उपयोग करते रहे हैं। हालांकि, इन मामलों में हर बार प्लेटफॉर्म की सीधी भूमिका साबित नहीं हुई है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियां इसकी गतिविधियों पर नजर रखती रही हैं।


टेलीग्राम को सुनने का अवसर

सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को बताया कि प्रतिबंध लगाने से पहले टेलीग्राम के प्रतिनिधियों को बुलाया गया था और उनका पक्ष भी सुना गया था। उनकी दलीलों और जांच से जुड़े निष्कर्षों को रिकॉर्ड में शामिल किया गया। सरकार ने यह भी बताया कि पूरे मामले की समीक्षा एक उच्चस्तरीय समिति ने की थी, जिसकी अध्यक्षता कैबिनेट सचिव कर रहे थे। समिति की रिपोर्ट के आधार पर ही अंतिम निर्णय लिया गया।


टेलीग्राम के फीचर्स पर चर्चा

टेलीग्राम के कुछ विशेष फीचर्स भी इस विवाद का केंद्र रहे हैं। प्लेटफॉर्म पर एक समूह में बड़ी संख्या में लोगों को जोड़ा जा सकता है और बड़ी फाइलों को आसानी से साझा तथा संग्रहित किया जा सकता है। इसके अलावा, कुछ मामलों में सीमित पहचान के साथ अकाउंट बनाने की सुविधा भी उपलब्ध होती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यही विशेषताएं प्लेटफॉर्म को लोकप्रिय बनाती हैं और कुछ परिस्थितियों में प्रशासनिक चुनौतियां भी पैदा करती हैं।


व्हाट्सऐप से टेलीग्राम की भिन्नताएँ

हालांकि टेलीग्राम और व्हाट्सऐप दोनों मैसेजिंग ऐप हैं, लेकिन दोनों की कार्यप्रणाली में कई अंतर हैं। टेलीग्राम अपने बड़े समूहों, चैनलों, क्लाउड स्टोरेज और कस्टम फीचर्स के कारण अलग पहचान रखता है। यही वजह है कि यह प्लेटफॉर्म बड़ी संख्या में उपयोगकर्ताओं को आकर्षित करता है। लेकिन इसी व्यापक पहुंच और सुविधाओं के कारण कई बार यह सरकारी एजेंसियों और सुरक्षा विशेषज्ञों की जांच के दायरे में भी आ जाता है।