भारतीय बीमा क्षेत्र के लिए लागत प्रबंधन का नया फ्रेमवर्क ‘इन्सकॉस्ट’
लागत प्रबंधन में सुधार के लिए नया फ्रेमवर्क
फ्रेमवर्क बीमा कंपनियों को लागत नियंत्रण, पारदर्शिता और जवाबदेही मजबूत करने के लिए देगा व्यवस्थित दिशा
नई दिल्ली: द इंस्टीट्यूट ऑफ कॉस्ट अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (आईसीएमएआई) ने भारतीय बीमा उद्योग में लागत प्रबंधन, पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ाने के लिए ‘इन्सकॉस्ट’ नामक एक नया फ्रेमवर्क पेश किया है। यह फ्रेमवर्क 2026 के पहले संस्करण के रूप में तैयार किया गया है, जो बीमा क्षेत्र की विशिष्ट आवश्यकताओं को ध्यान में रखता है।
आईसीएमएआई के अध्यक्ष, सीएमए चित्तरंजन चट्टोपाध्याय ने बताया कि यह फ्रेमवर्क भारतीय बीमा क्षेत्र के विकास के महत्वपूर्ण समय में प्रस्तुत किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक ‘सभी के लिए बीमा’ के लक्ष्य की दिशा में बेहतर लागत प्रबंधन और प्रशासन की आवश्यकता और भी बढ़ जाएगी।
‘इन्सकॉस्ट’ फ्रेमवर्क में लागत अभिलेख, प्रबंधन, प्रशासन, प्रकटीकरण और आश्वासन से संबंधित विभिन्न पहलुओं को समाहित किया गया है। इसमें रणनीतिक लागत प्रबंधन और उत्पाद लाभप्रदता जैसे विषयों को भी शामिल किया गया है। आईसीएमएआई के अनुसार, यह एक व्यापक और उप-क्षेत्र आधारित वैश्विक प्रयास है, जिसमें जीवन बीमा, सामान्य बीमा, स्वास्थ्य बीमा, पुनर्बीमा और सार्वजनिक क्षेत्र की बीमा संस्थाओं को ध्यान में रखा गया है।
यह फ्रेमवर्क आईसीएमएआई द्वारा विकसित कॉस्ट अकाउंटिंग स्टैंडर्ड्स और सामान्यतः स्वीकृत लागत लेखांकन सिद्धांतों को बीमा क्षेत्र की आर्थिक संरचना के अनुरूप ढालता है। इसमें लागत आवंटन, प्रबंधन व्यय, दावों और वितरण से जुड़ी लागत, बैंकएश्योरेंस, सरकारी योजनाओं, रणनीतिक लागत विश्लेषण और बीमा उत्पादों की लाभप्रदता पर मार्गदर्शन दिया गया है।
प्रस्तुति के दौरान यह भी बताया गया कि बीमा क्षेत्र में केवल दावों के प्रबंधन पर ध्यान देने के बजाय लागत प्रबंधन पर भी समान रूप से ध्यान देना आवश्यक है। अधिग्रहण, खरीद और अन्य परिचालन लागत पर प्रभावी नियंत्रण से बीमा कारोबार की दक्षता और लाभप्रदता को बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
आईसीएमएआई के उपाध्यक्ष, सीएमए मनोज आनंद ने कहा, “इन्सकॉस्ट फ्रेमवर्क बीमा क्षेत्र की पूरी मूल्य श्रृंखला में निर्णय लेने की प्रक्रिया में लागत संबंधी सूचनाओं की भूमिका को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इससे पॉलिसीधारकों के लिए बेहतर मूल्य सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।”
फ्रेमवर्क का उद्देश्य अधिक किफायती बीमा उत्पादों के विकास और देश में बीमा की पहुंच बढ़ाने में भी सहयोग करना है। इसमें लागत को केवल लेखांकन से जुड़ी संख्या के रूप में नहीं, बल्कि प्रबंधन और प्रशासन के महत्वपूर्ण मानक के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
फ्रेमवर्क में ‘कॉस्ट मैच्योरिटी मॉडल’ और चरणबद्ध ‘इम्प्लीमेंटेशन रोडमैप’ भी शामिल किया गया है, जिससे बीमा कंपनियां अपने आकार और क्षमता के अनुसार लागत प्रबंधन को मजबूत कर सकेंगी। इसमें कॉस्ट एंड मैनेजमेंट अकाउंटेंट्स की भूमिका को भी रेखांकित किया गया है।
यह प्रकाशन ऐसे समय में आया है जब आईआरडीएआई ने ‘इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूशन के इकोनॉमिक्स को फिर से संतुलित करने के लिए सुधार’ विषय पर सार्वजनिक परामर्श पत्र जारी किया है।
आईसीएमएआई के अध्यक्ष ने कहा, “मैं ‘इन्सकॉस्ट’ फ्रेमवर्क को बीमा कंपनियों, निदेशक मंडलों, नियामकों और पेशेवरों के समक्ष प्रस्तुत करता हूं। मेरा विश्वास है कि यह पहल बीमा क्षेत्र में बेहतर लागत प्रशासन को बढ़ावा देगी।”