बुजुर्गों की सुरक्षा के लिए आया डबल ओटीपी सिस्टम: जानें कैसे करेगा काम
नई दिल्ली में साइबर सुरक्षा का नया उपाय
नई दिल्ली: देश में बढ़ते साइबर धोखाधड़ी के मामलों, विशेषकर ऑनलाइन बैंकिंग स्कैम और 'डिजिटल अरेस्ट' जैसे मानसिक दबाव वाले अपराधों को रोकने के लिए एक अनोखा सुरक्षा उपाय पेश किया गया है। यह 'डबल ओटीपी सिस्टम' बुजुर्गों के बैंक खातों की सुरक्षा के लिए विकसित किया गया है।
नया टू-स्टेप वेरिफिकेशन
रिपोर्टों के अनुसार, हरियाणा पुलिस और एचडीएफसी बैंक ने मिलकर इस सुरक्षित तकनीकी प्रणाली को लागू किया है। अक्सर बुजुर्ग लोग तेजी से बदलती डिजिटल दुनिया में ठगों के जाल में फंस जाते हैं। कई बार ठग केवल एक ओटीपी प्राप्त करके या डराकर कुछ ही मिनटों में पूरा खाता खाली कर देते हैं। इस समस्या को हल करने के लिए यह नया टू-स्टेप वेरिफिकेशन सिस्टम लाया गया है।
डबल ओटीपी सिस्टम की विशेषताएँ
यह प्रणाली ऑनलाइन बैंकिंग लेन-देन के दौरान सुरक्षा की एक अतिरिक्त परत प्रदान करती है। पारंपरिक तरीके में पैसे ट्रांसफर के लिए केवल एक ओटीपी की आवश्यकता होती है, जो खाताधारक के फोन पर आता है। लेकिन नए सिस्टम में बड़े या संदिग्ध लेन-देन के लिए दो अलग-अलग ओटीपी की पुष्टि करनी होगी।
डिजिटल अरेस्ट का खतरा
अक्सर 'डिजिटल अरेस्ट' जैसे घोटालों में ठग बुजुर्गों को कानूनी डर दिखाकर उन्हें अलग-थलग कर देते हैं और उनसे जबरन ओटीपी ले लेते हैं। ऐसे समय में पारंपरिक सुरक्षा उपाय विफल हो जाते हैं। यह नया सिस्टम इसी मनोवैज्ञानिक दबाव को तोड़ने का प्रयास करता है।
सुरक्षा का नया चक्र कैसे काम करेगा?
यदि कोई वरिष्ठ नागरिक अपने खाते से बड़ा ऑनलाइन लेन-देन शुरू करता है, तो प्रक्रिया दो चरणों में पूरी होगी। पहले चरण में, एक स्टैंडर्ड ओटीपी उनके पंजीकृत मोबाइल नंबर पर भेजा जाएगा। पहले ओटीपी के दर्ज होने के बाद सिस्टम एक पॉज लेगा।
पैसा ट्रांसफर नहीं होगा
इसके बाद, एक दूसरा अनिवार्य ओटीपी या अप्रूवल कॉल खाताधारक द्वारा पहले से नामांकित किसी विश्वसनीय संपर्क के मोबाइल नंबर पर जाएगा। जब तक दोनों ओटीपी सही-सही दर्ज नहीं किए जाएंगे, तब तक पैसा ट्रांसफर नहीं होगा।
पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरुआत
यह सुविधा 60 वर्ष और उससे अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों के लिए पूरी तरह स्वैच्छिक है। फिलहाल, इसे एचडीएफसी बैंक द्वारा हरियाणा के गुरुग्राम और पंचकुला में एक पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू किया गया है। यदि यह सफल होता है, तो अन्य प्रमुख बैंक भी इसे अपनाने की योजना बना रहे हैं, ताकि बुजुर्गों की गाढ़ी कमाई को सुरक्षित रखा जा सके। अब यदि ठग पहले ओटीपी को प्राप्त कर भी लें, तो भी वे परिवार के किसी अन्य सदस्य की अनुमति के बिना चोरी नहीं कर पाएंगे।