भारत की सड़क अवसंरचना कंपनियों का 40,000 करोड़ रुपये का निवेश योजना
सड़क अवसंरचना में निवेश की नई योजना
नई दिल्ली : हाल ही में जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत की सड़क अवसंरचना कंपनियां वित्त वर्ष 2026-27 में इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (इनविट्स) के माध्यम से लगभग 40,000 करोड़ रुपये की संपत्ति का मोनेटाइजेशन करने की योजना बना रही हैं। इसका मुख्य उद्देश्य पूंजी जुटाना, कर्ज का बोझ कम करना और भविष्य के विकास के लिए वित्तीय संसाधन प्राप्त करना है।
ब्रिकवर्क रेटिंग्स की रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि इस वित्तीय वर्ष में सड़क क्षेत्र में सरकार के निरंतर निवेश के चलते लगभग 10,000 किलोमीटर नए हाईवे, एक्सप्रेसवे और हाई-स्पीड कॉरिडोर परियोजनाओं का आवंटन किया जाएगा।
रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2027 में सड़क अवसंरचना क्षेत्र की क्रेडिट प्रोफाइल स्थिर रहने की उम्मीद है, जिसका मुख्य कारण मजबूत टोल संग्रह, परियोजनाओं की स्वस्थ पाइपलाइन और नए वित्तपोषण मॉडलों को तेजी से अपनाना है।
इस क्षेत्र की आय में वित्त वर्ष 2027 के दौरान 8.6 प्रतिशत की वृद्धि होने की संभावना है, जबकि वित्त वर्ष 2026 में यह वृद्धि 7.3 प्रतिशत रहने का अनुमान है। इसके साथ ही, ऑपरेटिंग मार्जिन 24.3 प्रतिशत से बढ़कर 25.1 प्रतिशत तक पहुंच सकता है, जो परियोजनाओं के तेजी से क्रियान्वयन और कच्चे माल की लागत में कमी के कारण है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि स्टील और बिटुमेन की कीमतों में गिरावट और पहले से चल रही परियोजनाओं के तेजी से पूरा होने से कंपनियों की लाभप्रदता को समर्थन मिलेगा।
इसके अलावा, चालू हाईवे पर वाहनों की बढ़ती आवाजाही से भी कंपनियों की आय में वृद्धि होगी, जिससे निश्चित लागत अधिक राजस्व पर बंट जाएगी और परिचालन क्षमता में सुधार होगा।
हालांकि, रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई है कि भुगतान में देरी और परियोजनाओं के क्रियान्वयन में आने वाली बाधाएं कर्ज चुकाने की क्षमता को चुनौती दे सकती हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 और 2027 के दौरान डेट सर्विस कवरेज रेशियो लगभग 0.5 गुना रहने का अनुमान है, जबकि इंटरेस्ट कवरेज रेशियो 1.3 गुना से बढ़कर 1.5 गुना तक पहुंच सकता है।
सड़क अवसंरचना कंपनियां लगातार अपने ऑपरेशनल सड़क परिसंपत्तियों का इनविट्स के जरिए मोनेटाइजेशन कर रही हैं, ताकि नकदी बढ़ाई जा सके, कर्ज चुकाया जा सके और नई परियोजनाओं के लिए पूंजी जुटाई जा सके।
हालांकि, रिपोर्ट ने यह भी चेतावनी दी है कि राज्य सरकारों की परियोजनाओं में भुगतान से जुड़े जोखिम, लंबा रिसीवेबल साइकिल और आक्रामक बोली जैसी चुनौतियां अब भी इस क्षेत्र के सामने बनी हुई हैं।